समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के लिए पंजीकरण नवीनीकरण प्रक्रिया को लेकर एक अहम नियम लागू किया है। अब सभी NGOs को अपने FCRA (Foreign Contribution Regulation Act), 2010 के तहत पंजीकरण नवीनीकरण के लिए अपने प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त होने से कम से कम चार महीने पहले आवेदन करना अनिवार्य होगा।
इस नए नियम का उद्देश्य प्रक्रिया को समय पर पूरा करना और NGOs की सामाजिक गतिविधियों में किसी भी तरह की बाधा से बचना है।
क्या है FCRA पंजीकरण?
विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले हर NGO के लिए FCRA पंजीकरण अनिवार्य है। यह प्रमाणपत्र सामान्यतः पाँच साल के लिए वैध होता है। अवधि पूरी होने के बाद संगठनों को नवीनीकरण कराना पड़ता है।
FCRA की धारा 16(1) के अनुसार, किसी संगठन को अपने प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त होने से छह महीने पहले नवीनीकरण आवेदन करना होता है। केंद्र सरकार आवेदन मिलने के 90 दिनों के भीतर नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करती है।
देरी पर जताई गई चिंता
गृह मंत्रालय ने नोटिस में स्पष्ट किया कि कई संगठन अपने प्रमाणपत्र की समाप्ति से ठीक पहले या केवल 90 दिन पहले ही आवेदन जमा कर रहे हैं।
इससे मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों को जांच-पड़ताल पूरी करने में दिक्कत आती है। FCRA नवीनीकरण के लिए अनिवार्य रूप से सुरक्षा क्लीयरेंस (Security Clearance) की जरूरत होती है, और आवेदन देर से जमा होने पर यह प्रक्रिया प्रभावित होती है।
नया चार महीने का नियम
मंत्रालय ने कहा है कि अब NGOs को अपने नवीनीकरण आवेदन प्रमाणपत्र समाप्त होने से कम से कम चार महीने पहले जमा करने होंगे।
इस कदम का सीधा फायदा यह होगा कि:
- गृह मंत्रालय के पास सुरक्षा एजेंसियों से जानकारी जुटाने का पर्याप्त समय होगा।
- NGOs को विदेशी फंडिंग मिलने में कोई रुकावट नहीं होगी।
- सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी गतिविधियाँ बिना बाधा जारी रह सकेंगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्देश?
देशभर में हजारों NGOs विदेशी फंडिंग के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
नई समय सीमा लागू होने से NGOs की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और अनुशासित होगी। साथ ही, सरकार यह सुनिश्चित कर सकेगी कि विदेशी फंडिंग का उपयोग केवल वैध और राष्ट्रहित में हो।
केंद्रीय गृह मंत्रालय का यह निर्णय न केवल प्रक्रियात्मक दक्षता बढ़ाएगा बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि NGOs की गतिविधियाँ सुचारू रूप से जारी रहें। अब यह जिम्मेदारी NGOs पर है कि वे समय रहते अपने आवेदन दाखिल करें और नियमों का अनुपालन करें।
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