कैप्टन स्मित मच्छर पर गांधी परिवार की चुप्पी: चूक या वोट बैंक की राजनीति?

जब एक सनातनी हिंदू भारतीय पायलट कैप्टन स्मित ने 174 लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली, तो कांग्रेस के राहुल गांधी और उनके परिवार के पास देश को राजनीति से ऊपर रखने का एक सीधा मौका था, लेकिन उन्होंने केवल चुप्पी साधे रखना चुना। क्यों?

  डॉ. कुमार राकेश

सार्वजनिक जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं जब एक राजनेता की चुप्पी, सौ भाषणों से भी ज्यादा कुछ बयां कर जाती है। कैप्टन स्मित मच्छर (Captain Smit Machchhar) को लेकर चल रहा विवाद कुछ ऐसा ही पल है। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जाने वाली फ्लाईदुबई (Flydubai) की उड़ान संख्या FZ1073 पर एक भारतीय पायलट को एक असाधारण कॉकपिट आपातकाल का सामना करना पड़ा। खबरों के अनुसार, जब विमान में 174 लोग सवार थे, तब ओमान के नागरिक और 29 वर्षीय मुस्लिम युवक, सह-पायलट हमामी अल हमामी ने कैप्टन स्मित पर हमला कर दिया।

गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, उन्होंने सूझबूझ से कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिससे अन्य लोगों को दखल देने का मौका मिला और एक बड़ी तबाही टल गई। उनकी और अन्य चार यात्रियों की इस बहादुरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से सराहना मिली है। कैप्टन स्मित ने भी हमारे पीएम श्री मोदी, भारत के लोगों और इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का उनकी शुभकामनाओं और साहसिक समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया है।

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति राहुल गांधी द्वारा कैप्टन स्मित पर कुछ न बोलने का एक बड़ा कारण हो सकता है, क्योंकि वे एक हिंदू भारतीय हैं और राहुल अपने जीवन में बहुत ही व्यवस्थित और नपे-तुलने तरीके से राजनीति करते हैं। मानवता के लिए कैप्टन स्मित के इस महान योगदान पर पार्टी का चुप्पी साधना इसी वजह से हो सकता है।

क्या गांधी परिवार की चुप्पी तुष्टिकरण है?

जब पूरा देश इस पायलट के साहस की चर्चा कर रहा था, तब भारत में एक असहज सवाल उठा — लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कहां थे? क्योंकि ये सभी संसद सदस्य भी हैं।

अब यह सवाल केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। भाजपा ने खुलकर कांग्रेस के गांधी परिवार पर उनकी चुप्पी को लेकर सवाल खड़े किए हैं, और अब यह मुद्दा एक बड़ी राजनीतिक चर्चा बन गया है। भाजपा नेताओं डॉ. सुधांशू त्रिवेदी, संबित पात्रा और अन्य ने विशेष रूप से पूछा है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने व्यक्तिगत रूप से कैप्टन स्मित की बहादुरी की सराहना क्यों नहीं की? इसके पीछे क्या कारण है?

संबित पात्रा ने राहुल गांधी की कथित ओमान यात्रा और फ्लाईदुबई की इस घटना को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं:

क्या राहुल गांधी 3 मई के आसपास ओमान में थे?

इस यात्रा की मेजबानी किसने की थी?

इसके लिए पैसा किसने दिया था?

सह-पायलट का संबंध ओमान से क्यों बताया जा रहा है? क्या यह महज एक इत्तेफाक है या इसके पीछे कोई ऐसी बात है जिसकी जांच होनी चाहिए?

राजनीतिक चुप्पी और दोहरे मापदंड

बिना सबूत के किसी पर साजिश का आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए, लेकिन राहुल गांधी को भी अपनी चुप्पी के पीछे छिपने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यदि ओमान यात्रा नियमित थी, तो इसका खुलासा करें। यदि फंडिंग वैध थी, तो इसे सामने लाएं। यदि इस विमानन घटना से कोई संबंध नहीं है, तो इसे स्पष्ट रूप से स्थापित करें।

कांग्रेस यह दावा नहीं कर सकती कि पूरी पार्टी ने स्मित को नजरअंदाज किया, क्योंकि यह तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पायलट की प्रशंसा की, और कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि स्मित का साहस, त्वरित सोच और दृढ़ कार्रवाई प्रेरणादायक रहेगी और पूरा देश उनके काम से अचंभित है। वहीं दूसरी ओर, एक अन्य कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की कैप्टन स्मित पर की गई टिप्पणियां बेहद शर्मनाक थीं, जिसके लिए उन्हें शर्म आनी चाहिए।

लेकिन यह बचाव गांधी परिवार की चुप्पी को और अधिक समझ से परे बना देता है। जब कांग्रेस के अन्य नेता स्मित के साहस को पहचान सकते हैं, तो गांधी परिवार के सबसे प्रमुख सदस्यों को ऐसा करने से किसने रोका?

राष्ट्रीय गौरव बनाम राजनीतिक गणना

राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं। उनके राजनीतिक बयानों को सरकार के विकल्प के रूप में देखा जाता है। सोनिया गांधी (राज्यसभा सांसद) और प्रियंका गांधी वाड्रा (लोकसभा सांसद) भी देश की सबसे प्रमुख हस्तियों में से हैं। ऐसे में असाधारण सार्वजनिक महत्व के मामले पर उनकी चुप्पी का भी एक राजनीतिक अर्थ निकलता है।

यह कोई साधारण घटना नहीं थी। इसमें 174 लोगों की सुरक्षा, कॉकपिट के अंदर हमला, एक बुरी तरह घायल भारतीय पायलट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना पाने वाला साहस शामिल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से कैप्टन स्मित से बात की। नेतन्याहू ने उनकी सार्वजनिक प्रशंसा की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कैप्टन स्मित के साहस को सराहा। यह घटना हमारे भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गई। फिर कांग्रेस के गांधी परिवार ने चुप रहना क्यों चुना?

ऐसी स्थिति में, विपक्ष के नेता को अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए किसी राजनीतिक गणना की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए थी — इसके लिए केवल बुनियादी मानवीय शिष्टाचार और साहस की पहचान की जरूरत थी।

जनता के सामने खड़े गंभीर सवाल

भले ही कांग्रेस इसे भाजपा का राजनीतिक अवसरवाद बताकर खारिज करने की कोशिश करे, लेकिन संदेशवाहक को खारिज करने से मूल सवाल खत्म नहीं होता।

क्या गांधी परिवार ने कैप्टन स्मित की खुलकर तारीफ इसलिए नहीं की, ताकि उनकी पसंदीदा राजनीतिक सोच को नुकसान न पहुँचे?

क्या राष्ट्रीय सम्मान और सुरक्षा के मामलों में भी राजनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए?

कैप्टन स्मित न तो कोई राजनेता थे, न ही सरकार के प्रवक्ता। वे एक पेशेवर पायलट थे जो एक आपातकालीन स्थिति से जूझ रहे थे और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी के तहत लोगों की जान बचाई। इसमें कोई वैचारिक या राजनीतिक जाल नहीं था।

एक आश्वस्त विपक्षी नेता को यह समझने में सक्षम होना चाहिए कि कुछ चीजें दलगत राजनीति से ऊपर होती हैं। यदि राहुल गांधी यह मानते हैं कि किसी भारतीय नायक की प्रशंसा करने से नरेंद्र मोदी को राजनीतिक लाभ मिलेगा, तो यह विपक्षी राजनीति की एक संकीर्ण समझ को दर्शाता है। राष्ट्रीय सम्मान को शून्य-सम (zero-sum) का खेल नहीं बनाया जाना चाहिए।

राहुल गांधी लगातार लोकतंत्र, जवाबदेही और अधिकारों की बात करते हैं। यदि नागरिक उनके आचरण, उनकी चुप्पी या उनकी ओमान यात्रा को लेकर सवाल पूछ रहे हैं, तो उन्हें स्पष्ट रूप से जवाब देना चाहिए। लोकतांत्रिक जवाबदेही केवल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल करने का हथियार नहीं है, बल्कि यह खुद पर भी लागू होती है।

सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की मांग हर नेता पर लागू होनी चाहिए। जनता अब केवल ‘चुप’ रहकर मिलने वाले जवाबों से संतुष्ट नहीं हो सकती। कैप्टन स्मित मच्छर का मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारे देश में राष्ट्रहित दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखा जा सकेगा?

लेखक के बारे में

डॉ. कुमार राकेश नई दिल्ली, भारत के एक वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, टिप्पणीकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं। पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में लगभग 35 वर्षों के अनुभव के साथ, उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है।

उन्होंने भारत के नौ टीवी न्यूज़ चैनलों के लिए प्रोड्यूसर-प्रेज़ेंटर के रूप में भी काम किया है। उन्होंने 50 से अधिक देशों की यात्रा की है और भारत तथा दुनिया भर के मुद्दों पर वहाँ से रिपोर्टिंग व लेखन किया है। उनके काम के लिए उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं।

वर्तमान में वे Global Governance News Group और Samagra Bharat Media Group के संपादकीय अध्यक्ष हैं।

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