गिरीराज सिंह का विवादित बयान: बोले—‘मुझे नमक हरामों के वोट की ज़रूरत नहीं

समग्र समाचार सेवा
पटना, 20 अक्टूबर: केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद गिरीराज सिंह एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। बिहार के अरवल ज़िले में शनिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ तीखी टिप्पणी की और कहा कि उन्हें “नमक हरामों के वोट” की कोई ज़रूरत नहीं है।

बिगूसराय से सांसद गिरीराज सिंह ने सभा के दौरान कहा कि उन्होंने एक मौलवी से पूछा था कि क्या उनके पास आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड है। मौलवी ने ‘हाँ’ में उत्तर दिया। फिर गिरीराज सिंह ने पूछा कि क्या यह कार्ड धर्म के आधार पर—हिंदू या मुस्लिम—दिया गया है, तो मौलवी ने ‘नहीं’ कहा।

इसके बाद सिंह ने उनसे सवाल किया कि क्या उन्होंने 2019 में उनके लिए वोट किया था। मौलवी ने पहले ‘हाँ’ कहा, लेकिन जब सिंह ने उन्हें ‘खुदा की कसम’ खाने को कहा, तो मौलवी ने इंकार कर दिया। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा, “मुसलमान हमारी योजनाओं का लाभ तो लेते हैं, लेकिन वोट नहीं देते। ऐसे लोग ‘नमक हराम’ कहलाते हैं। मैंने मौलवी साहब से कहा कि मुझे नमक हरामों के वोट की ज़रूरत नहीं।”

बयान पर उठे राजनीतिक सवाल

गिरीराज सिंह के इस बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने इसे सांप्रदायिक और विभाजनकारी बताया है। आरजेडी और कांग्रेस के नेताओं ने इस बयान की कड़ी निंदा की है और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है।
वहीं भाजपा की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि पार्टी सूत्रों ने कहा कि बयान को “व्यक्तिगत राय” के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि पार्टी की नीति के रूप में।

गिरीराज सिंह की सफाई और समर्थन में तर्क

अपने बयान पर मचे विवाद के बाद भी गिरीराज सिंह अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके शब्दों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैंने केवल इतना कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं का लाभ लेते हैं लेकिन उन्हें वोट नहीं देते, वे नैतिक रूप से गलत हैं। इसे सांप्रदायिक रंग देना गलत है।”

उन्होंने आगे कहा कि एनडीए सरकार ने बिहार में विकास के लिए सड़कों, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं में व्यापक सुधार किया है। “हमने सबके लिए काम किया, किसी के धर्म या जाति के आधार पर नहीं,” सिंह ने कहा।

विवादों से पुराना नाता

गिरीराज सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले भी वे अपने बयानों को लेकर कई बार चर्चा में रह चुके हैं। चाहे वह जनसंख्या नियंत्रण पर उनकी टिप्पणी हो या विपक्ष पर की गई तीखी आलोचना — गिरीराज सिंह अक्सर अपने सीधे और उग्र बयानों के कारण सुर्खियों में रहते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन इससे समाज में तनाव और विभाजन की भावना भी बढ़ सकती है।

गिरीराज सिंह का यह बयान आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को गरमा सकता है। जहां एक ओर यह बयान भाजपा के समर्थक वर्ग में चर्चा का विषय है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे अल्पसंख्यक विरोधी रुख के तौर पर पेश कर रहा है। राजनीतिक माहौल में इस बयान का असर कितना गहरा होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

 

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