डिमरखेड़ा, 17 अक्टूबर: “आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए हमें नीडोनॉमिक्स — अर्थात आवश्यकता-आधारित जीवन और निर्णय की अर्थशास्त्र — के सिद्धांतों को अपनाना होगा,” यह कहना था प्रो. मदन मोहन गोयल का, जो नीडोनॉमिक्स के प्रवर्तक, पूर्व कुलपति (तीन बार) एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं। वे “वोकल फॉर लोकल टुवर्ड्स आत्मनिर्भर भारत” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे, जिसका आयोजन सरकारी महाविद्यालय, डिमरखेड़ा, जिला कटनी द्वारा किया गया तथा मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रायोजित किया गया।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण एवं प्रो. गोयल का परिचय डॉ. स्वेता सिंह बघेल ने दिया। प्रो. गोयल ने डॉ. हर्षित कुमार दिवेड़ी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने इस कार्यक्रम के लिए उनके नाम की अनुशंसा की।
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प्रो. गोयल ने कहा कि खुले अर्थतंत्र में आत्मनिर्भरता— न कि बंद अर्थव्यवस्था में आत्मपर्याप्तता— ही सतत विकास की कुंजी है। उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” के नारे को बदलकर “ग्लोकलाइजेशन” (वैश्विक सोच और स्थानीय कार्य) की भावना अपनाने का आह्वान किया, जिससे स्वदेशी उद्यम सशक्त होंगे और भारत वैश्विक बाज़ार से जुड़ा रहेगा।
उन्होंने ग्रामीण औद्योगिकीकरण और कृषि क्षेत्र में इंद्रधनुष क्रांति की आवश्यकता पर बल देते हुए कृषि एवं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के बीच प्रतिस्पर्धा के स्थान पर सहयोग की भावना को बढ़ावा देने की बात कही। प्रो. गोयल ने दक्षिण कोरिया की “पाली-पाली” संस्कृति (तेजी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की आदत) से प्रेरित नवपरिभाषित नौकरशाही तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रतिपादित सार्वजनिक व्यय के सिद्धांत — विश्वास, बुद्धिमत्ता और मितव्ययिता — को अपनाने की आवश्यकता बताई।
अंत में प्रो. गोयल ने कहा कि नीडोनॉमिक्स, जो अहिंसक, आध्यात्मिक और नैतिक है, आत्मनिर्भर भारत के लिए नैतिक दिशा प्रदान करती है और इसे विक्सित भारत 2047 की दिशा में आत्मबोध एवं सामूहिक प्रगति की यात्रा बना देती है।
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