जीएसटी सुधार: कर प्रणाली बनी सरल, आम जनता और व्यवसायों को बड़ा लाभ

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7 सितंबर: भारत की कर प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने माल एवं सेवा कर (GST) को पहले से अधिक सरल और सुविधाजनक बनाने का निर्णय लिया है। इस सुधार की प्रक्रिया रातोंरात नहीं हुई, बल्कि इसकी शुरुआत पिछले वर्ष दिसंबर में जैसलमेर में हुई जीएसटी परिषद की बैठक से हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जीएसटी को व्यवसायों के लिए सहज और कर दरों को युक्तिसंगत बनाया जाए।

सरल जीएसटी प्रणाली की ओर कदम

सरकार के हालिया निर्णय के बाद नई जीएसटी प्रणाली में कर दरों को घटाया गया है और अनुपालन की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि रोजमर्रा की उपयोग की करीब 400 वस्तुओं पर कर दरों में कमी की गई है। इससे कंपनियों का बोझ कम होगा और आम जनता को भी राहत मिलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी की पहल

वित्त मंत्री ने कहा कि जैसलमेर की बैठक से पहले प्रधानमंत्री ने उन्हें फोन पर यह संदेश दिया था कि जीएसटी को व्यवसायों और जनता दोनों के लिए अधिक सरल बनाना अनिवार्य है। इतना ही नहीं, बजट सत्र के दौरान भी प्रधानमंत्री ने सीतारमण को इस दिशा में काम जारी रखने की याद दिलाई।

मंत्री समूह का योगदान

सीतारमण ने बताया कि जीएसटी सुधार को आकार देने में मंत्री समूह ने अहम भूमिका निभाई। यह समूह पिछले डेढ़ साल से लगातार समीक्षा कर रहा था और अंततः एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई। इसके आधार पर परिषद ने व्यापक निर्णय लिए।

नई कर दरें और उनका प्रभाव

जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कर स्लैब को घटाकर चार से दो कर दिया है। अब सामान्य कर दरें 5% और 18% होंगी, जबकि विलासिता की वस्तुओं पर 40% की विशेष दर लागू होगी। ये नई दरें 22 सितंबर 2025 से लागू हो जाएंगी।

सरकार का दावा है कि इस बदलाव से न केवल उद्योगों को राहत मिलेगी, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी आवश्यक वस्तुएं सस्ती होंगी।

सुधार का व्यापक लाभ

वित्त मंत्री ने कहा कि यह सुधार केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे “लोगों के लिए सुधार” करार देते हुए कहा कि इसका सीधा लाभ देश के हर परिवार और 140 करोड़ नागरिकों को मिलेगा।

जीएसटी सुधारों को भारत की कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। प्रधानमंत्री की पहल और वित्त मंत्रालय की सक्रियता से लागू हुए ये परिवर्तन न केवल उद्योगों और व्यापारियों को लाभ देंगे, बल्कि आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी सीधा असर डालेंगे। नई कर दरों के लागू होने के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में बाजार और उपभोक्ता व्यवहार पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

 

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