जीएसटी सुधार से जीडीपी में मिलेगी नई रफ्तार, महंगाई घटने की उम्मीद

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 5 सितंबर: सरकार द्वारा नए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों की घोषणा के एक दिन बाद, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दरों में कटौती से वित्तीय वर्ष 2026 में जीडीपी में 0.1 से 0.16 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। साथ ही, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई में भी कमी की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के लगभग 48,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का अनुमान जीडीपी का 0.16 प्रतिशत है, और यही हानि अर्थव्यवस्था की वृद्धि को उसी अनुपात में बढ़ा सकती है। हालांकि, चूंकि यह सुधार वित्तीय वर्ष के मध्य में लागू किया गया है, इसलिए पूरे लाभ का असर 2027 में देखने को मिलेगा।

महंगाई पर असर

रिपोर्ट बताती है कि जीएसटी दरों में कटौती से सीपीआई महंगाई में 40-60 आधार अंक की कमी आ सकती है। कई उपभोक्ता वस्तुओं—जैसे बेकरी उत्पाद और व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद—की दरें 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई हैं।

चूंकि यह उत्पाद CPI बास्केट का 5.3 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, इसलिए महंगाई में उल्लेखनीय कमी देखी जा सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि यदि कर कटौती का केवल एक हिस्सा भी उपभोक्ताओं तक पहुँचता है, तो इस वर्ष महंगाई में 20-25 आधार अंक की गिरावट होगी। अगले वर्ष यह प्रभाव और अधिक होगा, जिससे महंगाई लगभग 4.5 प्रतिशत के आसपास स्थिर रह सकती है।

वैश्विक कारक और चुनौतियाँ

जहाँ एक ओर जीएसटी सुधार घरेलू मांग को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ इन लाभों को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9 प्रतिशत पर ही रखा गया है। हालांकि, महंगाई में कमी से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को ब्याज दरों में कटौती करने की अधिक गुंजाइश मिलेगी, जिससे घरेलू खपत और निवेश को नई ऊर्जा मिल सकती है।

सरल और संतुलित कर ढांचा

बुधवार को सरकार ने जीएसटी सुधारों को लागू किया, जिसके तहत अधिकांश वस्तुओं को दो कर स्लैब—5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत—में रखा गया है। वहीं, लग्ज़री और पापी वस्तुओं पर 40 प्रतिशत का कर लगाया गया है।

इस सुधार का उद्देश्य कर ढांचे को सरल और संतुलित बनाना है ताकि आम उपभोक्ता को राहत मिल सके और उद्योगों को स्थिरता।

जीएसटी सुधारों को लेकर यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को इससे मजबूती मिलेगी। महंगाई पर अंकुश, खपत में बढ़ोतरी और जीडीपी को गति देने के साथ यह सुधार भारत को वैश्विक चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भर बनाने में सहायक साबित हो सकता है।

 

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