पूर्व OSD पर ED एक्शन के बाद हरीश रावत का इस्तीफा
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी के ठिकानों पर छापे में मिला करोड़ों का कैश और सोना, राजनीतिक हलकों में मचा हड़कंप।
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2016 के UKSSSC भर्ती घोटाले के सिलसिले में उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत के पूर्व OSD और PA चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी की है।
- इस रेड के दौरान ईडी ने भारी मात्रा में बेहिसाबी नकदी, सोने के गहने और लग्जरी घड़ियां बरामद की हैं।
- इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
समग्र समाचार सेवा
देहरादून, 12 सितंबर: उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार और भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की। प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत देहरादून में कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई साल 2016 की उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा में हुई कथित बड़ी अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में की गई। इस रेड के दौरान उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के पूर्व OSD (विशेष कार्याधिकारी) तथा निजी सहायक रह चुके चंदन सिंह जीना के आवास से भारी मात्रा में बेहिसाबी नकदी और कीमती सामान बरामद किया गया है।
चंदन सिंह जीना के आवास से बरामद हुआ कैश और सोना
जांच एजेंसी के अनुसार, इस तलाशी अभियान के दौरान पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के परिसरों से लगभग 32 लाख रुपये नकद, करीब 200.5 ग्राम सोने के सिक्के व चेन (13 सोने के सिक्के और 7 सोने की चेन) तथा 12 महंगी लग्जरी घड़ियां बरामद की गई हैं। यह मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपने पूर्व करीबी सहयोगी का नाम आने और ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के बाद कांग्रेस पार्टी की छवि पर भी सवाल उठने लगे थे, जिसके चलते राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
हरीश रावत ने छोड़े कांग्रेस के सभी महत्वपूर्ण पद
अपने पूर्व OSD के ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थाई आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। हरीश रावत ने सोशल मीडिया और प्रेस बयानों के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे नहीं चाहते कि उनके किसी भी करीबी से जुड़े विवाद या इस कार्रवाई के कारण पार्टी का भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष कमजोर पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानून की निष्पक्ष जांच का पूरा समर्थन करते हैं और यदि इस मामले में कोई भी संलिप्त पाया जाता है तो उसे कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए।
भर्ती घोटालों और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षाओं में पारदर्शिता के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। विपक्षी दल और जनता लगातार यह मांग कर रहे हैं कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने जनता के सामने सफाई देते हुए यह भी कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान लाखों युवाओं को पारदर्शी तरीके से नौकरियां दी गई थीं, लेकिन यदि इस प्रक्रिया में कोई व्यक्तिगत रूप से भ्रष्टाचार या गड़बड़ी में लिप्त पाया जाता है, तो कानून को अपना काम कड़ाई से करना चाहिए। आने वाले दिनों में इस मामले में ईडी की जांच और तेज होने की पूरी संभावना है।
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