समग्र समाचार सेवा,
गुवाहाटी, 27 मई: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को एक अहम घोषणा करते हुए दावा किया कि राज्य में 2026 तक बाल विवाह की प्रथा पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। उन्होंने कहा कि असम सरकार द्वारा सख्त कानूनी कार्रवाई के चलते इस सामाजिक बुराई में 81 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “हमारी सरकार लगातार बाल विवाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है और समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। इन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल रही है।”
एनडीए मुख्यमंत्रियों की बैठक में असम मॉडल की सराहना
मुख्यमंत्री ने बताया कि रविवार को नई दिल्ली में हुई एनडीए के मुख्यमंत्रियों की बैठक में भी असम सरकार की इस पहल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विशेष सराहना की गई। बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि बाल विवाह को समाप्त करने के लिए अन्य राज्यों को “असम मॉडल” अपनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे असम जाकर यह अध्ययन करें कि कैसे राज्य सरकार ने इतनी तेजी से बाल विवाह की घटनाओं में गिरावट दर्ज की है। सरमा ने कहा, “यह असम के लिए गर्व की बात है कि हमारे प्रयासों को पूरे देश में एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।”
राज्य की अन्य सफल योजनाओं की भी चर्चा
बैठक के दौरान सभी एनडीए शासित राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए बेहतरीन कार्यों की जानकारी साझा की। इसमें जल संरक्षण, प्रशासनिक सुधार, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और खेल विकास जैसी योजनाएं शामिल थीं।
मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि बाल विवाह की समाप्ति केवल एक कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से भी जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि असम सरकार इन सभी मोर्चों पर एकसाथ काम कर रही है।
बाल विवाह जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर असम सरकार की यह पहल न केवल राज्य के भीतर बदलाव ला रही है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की प्रतिबद्धता और कठोर कानूनी नीति के कारण 2026 तक असम को बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत में बदलता दिख रहा है।
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