अस्पताल निर्माण घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, AAP प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के घर छापा

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27 अगस्त: अस्पताल निर्माण में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री सौरभ भारद्वाज के घर छापा मारा। ईडी की इस कार्रवाई के बाद राजधानी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

बीजेपी का आरोप: “रेड तो बस एक बानगी है”

दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस रेड पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह तो बस एक शुरुआत है और आने वाले समय में इस घोटाले में शामिल AAP नेताओं के चेहरे उजागर होंगे।

उन्होंने कहा कि भारद्वाज अब लोगों को यह कहकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं कि अस्पताल निर्माण की योजना उनकी नहीं थी, लेकिन यह सच है कि जब अस्पतालों के निर्माण में गड़बड़ियां हुईं, तब वे मंत्री पद पर थे।

अस्पताल निर्माण कार्य और अधूरी योजनाएं

सचदेवा ने आरोप लगाया कि AAP सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में कई अस्पतालों और ब्लॉकों के निर्माण की योजना बनाई थी।

  • कई परियोजनाओं का काम शुरू तो हुआ, लेकिन एक भी अस्पताल निर्माण आप सरकार के कार्यकाल में पूरा नहीं हुआ
  • उन्होंने कहा कि यह सब इसलिए हुआ क्योंकि सरकार ने योजनाएं अधूरी और बिना ठोस आधार के बनाई थीं।

भाजपा का आरोप है कि अस्पताल निर्माण के नाम पर छोटे-छोटे टेंडर दिए गए और मंत्री स्तर पर उपकरणों की खरीद-फरोख्त में अनियमितताएं की गईं। इस प्रक्रिया में सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज की सक्रिय भूमिका रही।

कोविड काल में अधूरे वादे

सचदेवा ने याद दिलाया कि कोविड महामारी के दौरान आप सरकार ने सात अस्थायी अस्पताल बनाने का दावा किया था।

  • लेकिन इनमें से एक भी अस्पताल समय पर तैयार नहीं हुआ
  • उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री रहे भारद्वाज पर दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की खरीद में भी गड़बड़ियों के गंभीर आरोप हैं।

बीजेपी का रुख और AAP की प्रतिक्रिया

भाजपा का कहना है कि वह शुरू से ही अस्पताल निर्माण घोटाले को मुद्दा बनाती रही है और अब ईडी की कार्रवाई से यह साफ हो रहा है कि आरोपों में दम है।

वहीं AAP नेताओं का कहना है कि यह रेड राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और दिल्ली सरकार के कामकाज को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है

राजनीतिक महत्व

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे ईडी की जांच आगे बढ़ेगी, दिल्ली की राजनीति और गरमाएगी।

  • एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को 2027 विधानसभा चुनाव तक ले जाने की तैयारी कर रही है।
  • वहीं AAP इसे “केंद्र सरकार की एजेंसियों के दुरुपयोग” का मामला बताकर जनता के बीच सहानुभूति जुटाने की कोशिश करेगी।

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