समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7 अगस्त: अमेरिका ने भारत से आयातित माल पर टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया है, जिसकी लहरें अब सोने की कीमतों और बाजार पर असर डालने लगी हैं। Commodity विशेषज्ञ अजय केडिया से बातचीत में यह स्पष्ट हुआ कि इस आशंका के बीच—क्या निवेशकों को सोने को लेकर घबराना चाहिए और कीमतें किस दिशा में जा सकती हैं—उनोंने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
ज्वेलरी और निर्यात से जुड़ी जटिलता
ट्रंप द्वारा लागू टैरिफ से सबसे अधिक प्रभाव ज्वेलरी और हीरे जैसे निर्यातित उत्पादों पर पड़ा है, क्योंकि भारत अमेरिका को एडी ज्वेलरी सहित अत्यधिक मात्रा में निर्यात करता है। अजय केडिया के अनुसार इस वृद्धि से रुपये की मुद्रा पर दबाव पड़ा, जिससे सोने की कीमतों में और मांग में उतार-चढ़ाव आया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट भी किया कि सोने या चांदी पर कोई प्रत्यक्ष टैरिफ नहीं लगाया गया है।
सोना खरीदें या प्रतीक्षा करें?
अजय केडिया इस संदर्भ में स्पष्ट स्वर से कहते हैं कि सोना खरीदने से पहले यह समझना आवश्यक है कि आपका उद्देश्य क्या है:
- उपभोक्ता उद्देश्य से खरीदना हो (शादी, पूजा, त्यौहार): थोड़ा-थोड़ा खरीद सकते हैं—अभी न परेशान हों।
- निवेश उद्देश्य से खरीदना हो: अभी इंतजार करना बेहतर रहेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की कीमतों में जल्द वृद्धि हो सकती है, लेकिन जब इन्हें “करेक्शन” के रूप में गिरते देखा जाए, तभी खरीदारी की अनुशंसा दी गई है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि गोल्ड में निवेश करने से पहले बाज़ार की चाल, ब्याज दरें, डॉलर की स्थिति और वैश्विक राजनीतिक अव्यवस्था जैसी परिस्थिति को समझना जरूरी है।
सोने पर असर किन परिस्थितियों में देखा जा सकता है?
- रुपये की गिरावट के कारण घरेलू सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- निर्यात उद्योग पर बढ़े टैरिफ का प्रभाव आम खर्चों और मांग दोनों पर पड़ सकते हैं।
- संयुक्त रूप से वैश्विक अस्थिरता, मुद्रास्फीति और रु-डॉलर दरों में उतार-चढ़ाव भविष्य में सोने की कीमतें प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञ का निष्कर्ष
अजय केडिया का निष्कर्ष सरल है:
“मौजूदा समय में सोने पर घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन इसे खरीदने से पहले सही समय की प्रतीक्षा करें।”
उनका मानना है कि सोना एक सुरक्षित डॉलर वैकल्पिक संपत्ति हो सकता है, लेकिन इसे निवेशक भावुक निर्णय नहीं बल्कि रणनीतिक सोच के साथ खरीदें।
अमेरिकी टैरिफ वृद्धि ने स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक आर्थिक रुझानों का प्रभाव बाज़ार में महसूस किया जा सकता है, लेकिन इसका सीधा असर सोने जैसे धातु निष्क्रिय निवेश उत्पादों पर नहीं सभी। जो लोग सोने को निवेश के रूप में देख रहे हैं, उन्हें धैर्य रखना चाहिए और बाजार की सही चाल का इंतजार करना चाहिए। वहीं अगर आपका उद्देश्य रुपये की बचत सुनिश्चित करना है, तो सीमित मात्रा में सोना खरीदना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
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