स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: जीएसटी में अगली पीढ़ी के सुधार, आम आदमी से एमएसएमई तक को राहत
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 15 अगस्त: 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को 2017 के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताते हुए इसके अगली पीढ़ी के सुधारों का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से आम आदमी, किसानों, मध्यम वर्ग, महिलाओं, विद्यार्थियों और एमएसएमई को सीधी राहत मिलेगी।
पीएम मोदी ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को पूरा करने के लिए जीएसटी को और सरल, स्थिर और पारदर्शी बनाना जरूरी है। इसके लिए केंद्र सरकार ने सुधार प्रस्ताव जीएसटी परिषद के मंत्रिसमूह (जीओएम) को भेज दिए हैं, जिन पर जल्द विचार होगा।
तीन स्तंभों पर आधारित सुधार योजना
संरचनात्मक सुधार
- उलटे शुल्क ढांचे का समाधान: इनपुट और आउटपुट कर दरों में संतुलन लाकर घरेलू उत्पादन और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा।
- वर्गीकरण विवाद खत्म करना: दर संरचना में एकरूपता, अनुपालन प्रक्रिया में सरलता और उद्योग को स्थिरता।
- दीर्घकालिक स्पष्टता: उद्योग जगत को नीति दिशा पर भरोसा, जिससे निवेश और योजना आसान हो।
2️⃣ दरों का युक्तिकरण
- आम आदमी से जुड़ी वस्तुओं पर कर में कमी: आवश्यक और महत्त्वाकांक्षी वस्तुएं ज्यादा सुलभ होंगी।
- स्लैब कम करना: दो मुख्य स्लैब — मानक और योग्यता — और चुनिंदा वस्तुओं पर विशेष दरें।
- क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त: कर संरचना में अधिक लचीलापन और स्थिरता।
रहन-सहन की सुगमता
- पंजीकरण में सरलता: छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए निर्बाध, तकनीक-संचालित रजिस्ट्रेशन।
- पहले से भरे रिटर्न: मैन्युअल हस्तक्षेप और विसंगतियों में कमी।
- तेज रिफंड प्रक्रिया: निर्यातकों और उलटे शुल्क ढांचे वाले सेक्टर के लिए स्वचालित रिफंड।
सहकारी संघवाद की भावना
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सुधारों को लागू करने में राज्यों की सहमति और सहयोग अहम है। आने वाले हफ्तों में केंद्र और राज्य मिलकर विस्तृत सहमति बनाएंगे, ताकि बदलाव जल्द से जल्द लागू हो सकें।
जीएसटी परिषद की अगली बैठक में जीओएम की सिफारिशों पर चर्चा होगी और कोशिश की जाएगी कि चालू वित्त वर्ष में ही सुधार लागू हो जाएं, जिससे लाभ समय पर मिल सके।
जीएसटी का भविष्य
सरकार का लक्ष्य है कि जीएसटी को एक सरल, स्थिर और पारदर्शी कर प्रणाली के रूप में विकसित किया जाए, जो समावेशी विकास, औपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार का आधार बने।
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