INDIA ब्लॉक का बड़ा कदम: CEC के कानूनी संरक्षण कानून को चुनौती देगा विपक्ष
विपक्षी 'INDIA' गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के कानूनी संरक्षण (Immunity Law) के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय जाने और इसे कानूनी रूप से चुनौती देने की घोषणा की है।
- INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देने वाले हालिया इम्युनिटी कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की है।
- राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकालने और औपचारिक याचिका दायर करने का फैसला लिया है।
- विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और फॉर्म-6 में कथित बदलावों के माध्यम से मतदाता सूचियों में भारी हेरफेर की जा रही है, और सरकार CEC को कानूनी संरक्षण देकर इस प्रशासनिक विफलता को ढकने की कोशिश कर रही है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 12 अक्तूबर: देश की राजनीति में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक व्यवस्थाओं को लेकर चल रहा विवाद अब सर्वोच्च अदालत के दरवाजे तक पहुँच गया है। विपक्षी दलों के महामैत्री संगठन ‘INDIA ब्लॉक’ ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई व मुकदमों से सुरक्षा प्रदान करने वाले केंद्र सरकार के ‘लीगल इम्युनिटी’ (कानूनी संरक्षण) कानून को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में सीधे तौर पर चुनौती देने की अपनी व्यापक कानूनी रणनीति का ऐलान किया है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि लोकतंत्र में कोई भी पद या व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता और इस प्रकार का संरक्षण संस्थागत जवाबदेही को पूरी तरह खत्म कर देता है।
CEC के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और याचिका
सोमवार को राजधानी नई दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों की उच्चस्तरीय बैठक के बाद, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने घोषणा की कि INDIA ब्लॉक का एक प्रतिनिधिमंडल सर्वोच्च न्यायालय की ओर रुख करेगा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ एक औपचारिक याचिका (Petition) दाखिल करेगा। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग में ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में व्यापक अनियमितताएं सामने आई हैं। यद्यपि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने चल रहे न्यायिक मामलों का हवाला देते हुए विपक्षी नेताओं के साथ औपचारिक बैठक के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था, लेकिन विपक्ष ने न्यायिक मार्ग से ही इस इम्युनिटी कानून को रद्द कराने का संकल्प लिया है।
क्या है कानूनी संरक्षण कानून (CEC Immunity Law) का विवाद?
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान या उनके द्वारा लिए गए निर्णयों पर सीधे आपराधिक मुकदमों और कानूनी जांच से विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है। INDIA ब्लॉक के प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों और नेताओं का कहना है कि यह कानून चुनाव आयोग को जनता और राजनीतिक दलों के प्रति असीम और अनियंत्रित शक्तियाँ प्रदान करता है। विपक्ष का आरोप है कि इस संरक्षण का फायदा उठाकर हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 के नियमों में एकतरफा बदलाव किए गए हैं, जिससे लाखों पात्र मतदाताओं, विशेषकर हाशिए पर मौजूद समुदायों और युवाओं के वोट कटने का खतरा पैदा हो गया है।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं का कड़ा रुख
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संसद और संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करते हुए अपनी पसंदीदा प्रशासनिक नियुक्तियों को बचाने में लगी हुई है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “लोकतंत्र को बचाने के लिए संस्थाओं की निष्पक्षता बहाल करना पहली शर्त है। ज्ञानेश कुमार को अपने पद से जाना होगा और यह सरकार भी जाएगी, जिसके बाद लोकतंत्र की मरम्मत का काम शुरू होगा।” विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वे न केवल अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे, बल्कि सड़क से लेकर संसद तक इस जनविरोधी कानून के खिलाफ अपना शांतिपूर्ण जन-आंदोलन जारी रखेंगे।
राजनीतिक घमासान और सरकार का रुख
दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार ने विपक्ष के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज और भ्रामक करार दिया है। केंद्रीय मंत्रियों ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है और चुनाव हारने की हताशा में ऐसे गैर-जिम्मेदाराना कदम उठा रहा है। सरकार का तर्क है कि चुनाव आयुक्तों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का माहौल देने और राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने के लिए कानूनी संरक्षण बेहद आवश्यक है।
निष्कर्ष
विपक्ष द्वारा CEC के कानूनी संरक्षण कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने से देश का राजनीतिक और संवैधानिक तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। CJP के आंदोलनों, संसद के भीतर के विरोध और अब सुप्रीम कोर्ट के रुख के बीच यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस बेहद संवेदनशील संवैधानिक और कानूनी याचिका पर क्या रुख अपनाता है।
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