डब्ल्यूईएफ दावोस में भारत पर बढ़ा वैश्विक भरोसा: अश्विनी वैष्णव
क्रिटिकल मिनरल्स से लेकर एआई तक, भारत के साथ साझेदारी को तैयार दुनिया
-
डब्ल्यूईएफ दावोस में भारत को भरोसेमंद वैल्यू-चेन पार्टनर के रूप में मिली व्यापक मान्यता
-
क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित आपूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर
-
एआई, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स में भारत की भूमिका को वैश्विक समर्थन
-
फरवरी 2026 में नई दिल्ली में होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में भागीदारी का आह्वान
समग्र समाचार सेवा
दावोस (स्विट्ज़रलैंड), 23 जनवरी: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेल और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की दावोस बैठक के दौरान भारत के प्रति दुनिया का भरोसा और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि वैश्विक उद्योग जगत अब भारत को एक भरोसेमंद वैल्यू-चेन साझेदार के रूप में देख रहा है।
भारत की ग्रोथ स्टोरी को मिला वैश्विक समर्थन
वैष्णव ने बताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी को लेकर वैश्विक नेताओं में लगातार रुचि बढ़ रही है। दावोस में हुई बैठकों ने भारत की विकास यात्रा को और मजबूती दी है।
भारत में निवेश बढ़ाने को तैयार वैश्विक दिग्गज
चर्चा के दौरान सिंगापुर की प्रमुख निवेश कंपनी टेमासेक के अध्यक्ष तेओ ची हियान ने भारत में मौजूदगी बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई।मार्सक ने भारत में पोर्ट, शिपिंग और रेलवे लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर काम जारी रखने की बात कही, जबकि हनीवेल ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार में रुचि दिखाई।
एआई और सेमीकंडक्टर में भारत की बढ़ती भूमिका
वैष्णव ने गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हसाबिस और ओपनएआई के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर क्रिस लेहने से मुलाकात कर वैश्विक कल्याण के लिए एआई के उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने फरवरी 2026 में नई दिल्ली में प्रस्तावित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में वैश्विक एआई नेतृत्वकर्ताओं को सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।
क्रिटिकल मिनरल्स पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी
मंत्री ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स की वैल्यू-चेन जटिल है और इसकी रिफाइनिंग व प्रोसेसिंग के लिए बहुस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। उन्होंने जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका के साथ मौजूदा साझेदारियों को इस दिशा में अहम बताया।
स्वदेशी मोबाइल ब्रांड और मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम
सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर बोलते हुए वैष्णव ने बताया कि कई स्वीकृत इकाइयों में पायलट उत्पादन शुरू हो चुका है और जल्द ही व्यावसायिक उत्पादन की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अगले 12 से 18 महीनों में भारत के स्वदेशी मोबाइल फोन ब्रांड भी उभरते हुए दिखाई देंगे।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.