भारत-जापान संबंधों में नई दिशा: पीएम मोदी ने जापानी प्रांतों के गवर्नरों संग की बातचीत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टोक्यो में जापान के 16 प्रांतों के गवर्नरों के साथ मुलाकात की और राज्य-प्रांत साझेदारी को गहरा करने पर बल दिया। उन्होंने तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
समग्र समाचार सेवा
टोक्यो/दिल्ली, 30 अगस्त: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान के विभिन्न प्रांतों के गवर्नरों से मुलाकात कर भारत-जापान संबंधों को नई दिशा देने की पहल की। इस उच्चस्तरीय बातचीत में जापान के 16 गवर्नरों ने हिस्सा लिया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-जापान के संबंध सदियों पुराने सभ्यतागत रिश्तों पर आधारित हैं, जो आज और मजबूत होते जा रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि अब यह साझेदारी केवल दिल्ली और टोक्यो तक सीमित न रहकर राज्यों और प्रांतों के बीच भी गहराई से विकसित होनी चाहिए।
राज्य-प्रांत साझेदारी: विकास की नई धारा
पीएम मोदी ने 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान शुरू की गई राज्य-प्रांत साझेदारी पहल को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल से व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कौशल विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने भारतीय राज्यों और जापानी प्रांतों को आग्रह किया कि वे विनिर्माण, तकनीक, नवाचार, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप और एसएमई के क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी बनाएं।
जापानी तकनीक और भारतीय प्रतिभा: बदलाव की धुरी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जापान के प्रत्येक प्रांत की विशिष्ट आर्थिक और तकनीकी शक्तियां हैं, वहीं भारतीय राज्यों की अपनी विविध क्षमताएं हैं। इसीलिए, दोनों देशों को मिलकर युवाओं और कौशल के आदान-प्रदान को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने गवर्नरों से आग्रह किया कि वे जापानी तकनीक को भारतीय प्रतिभा के साथ जोड़ें, जिससे न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा बल्कि वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित होंगे।
गवर्नरों की प्रतिक्रिया
जापान के गवर्नरों ने भारत-जापान रिश्तों को और ऊंचा उठाने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को नए स्तर तक ले जाने के लिए उप-राष्ट्रीय सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
विश्लेषण और राय
यह पहल भारत-जापान साझेदारी को और बहुआयामी बनाएगी। अब तक यह संबंध राष्ट्रीय स्तर तक सीमित थे, लेकिन राज्यों और प्रांतों की भागीदारी से यह साझेदारी जमीनी स्तर तक गहराई पाएगी। खासकर स्टार्टअप, नवाचार, शिक्षा और कौशल विकास में यह मॉडल नए आर्थिक अवसर और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मार्ग प्रशस्त करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक भारत-जापान संबंधों में कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से ऐतिहासिक कदम है। यह केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है बल्कि संस्कृति, शिक्षा और मानव संसाधन विकास में भी नई संभावनाओं को जन्म देगा। यदि इस साझेदारी को सही दिशा में आगे बढ़ाया जाए, तो यह एशिया की स्थिरता, समृद्धि और वैश्विक नेतृत्व के लिए एक नया अध्याय सिद्ध होगा।
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