ब्रुसेल्स में भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर साधी चुप्पी को किया उजागर, यूरोपीय देशों से मांगा समर्थन
समग्र समाचार सेवा,
ब्रुसेल्स, 5 जून: पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर चुप्पी साधने वाले देशों को भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सीधे और सशक्त शब्दों में घेरा है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में भारतीय डेलीगेशन ने बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में हो रहे एक अंतरराष्ट्रीय संवाद के दौरान आतंकवाद पर दोहरे मापदंड अपनाने वाले देशों पर कड़े सवाल उठाए। भारत ने स्पष्ट किया कि अब दो कानूनों का युग समाप्त हो चुका है, और दुनिया को आतंक के खिलाफ एकजुट होना होगा।
इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने कहा, “हमारे साथ खड़े होने के बजाय, इतने सारे यूरोपीय देश क्यों तटस्थ हैं? जब भारत आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौती से जूझ रहा है, तब यूरोप के दोस्तों को तटस्थ नहीं रहना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने जो संदेश दुनिया को दिया है, वह मूल्यों पर आधारित है और उसकी गूंज हर कोने तक पहुंच रही है।”
#WATCH | Brussels, Belgium | Former Union Minister MJ Akbar says, "…Instead of standing with us, why are so many Europeans sitting on the fence?… Yet we need to remind our friends in Europe that when it comes to a critical challenge that we face at the moment, we cannot find… pic.twitter.com/YLPlE3cFQ5
— ANI (@ANI) June 4, 2025
ऑपरेशन सिंदूर पर उठी चर्चा
भारत द्वारा हाल में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की भी चर्चा बैठक में प्रमुखता से हुई। हालांकि यह ऑपरेशन पश्चिमी मीडिया में अपेक्षाकृत कम स्थान पा सका, लेकिन जर्मन मार्शल फंड की वरिष्ठ विश्लेषक गरिमा मोहन ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के उद्देश्य और इसके रणनीतिक नतीजों को समझना हमारे लिए मूल्यवान रहा। भारत ने स्पष्ट रूप से आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया और यह बहुत ही लक्षित और नीतिगत प्रतिक्रिया थी।”
पहलगाम हमले और कश्मीर मुद्दे पर खुली बातचीत
भारत में पूर्व राजदूत और एग्मोंट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ एसोसिएट जान लुइक्स ने कहा, “भारत से आए प्रतिनिधिमंडल का संदेश स्पष्ट था। कश्मीर में हालिया घटनाएं और पहलगाम में हुआ आतंकी हमला, जिसमें निर्दोष नागरिकों और पर्यटकों की जान गई, वैश्विक मंच पर गंभीर चिंता का विषय है। भारत की भूमिका को समझने में हमें इस संवाद से गहरी जानकारी और दृष्टिकोण मिला है।”
उन्होंने आगे कहा कि पहलगाम जैसी घटनाएं यूरोपीय जनमानस को भी झकझोरती हैं, और उनके प्रति सहानुभूति और समझ की भावना बहुत गहरी है।
आतंक के खिलाफ भारत की सख्त आवाज
भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृष्टिकोण को और स्पष्ट करते हुए कहा, “हर कोई कहता है कि बातचीत से हल निकल सकता है। लेकिन हम किससे बातचीत करें? उन जनरलों से जो खुलेआम कहते हैं कि हिंदू और मुसलमान साथ नहीं रह सकते? क्या प्रधानमंत्री मोदी को उन सैन्य अधिकारियों से बात करनी चाहिए जो आतंकवादियों को सलामी देते हैं?”
यूरोपीय प्रतिनिधियों का समर्थन
भारत की स्पष्ट और सशक्त अपील के बाद कई यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन किया और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की निंदा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भारत के साथ सहयोग और समर्थन आवश्यक है।
भारत ने ब्रुसेल्स में एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंकवाद के मुद्दे पर वह न केवल घरेलू स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी निष्कपट और निडर आवाज बनकर उभरा है। अब जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है, तो उसके लिए यह और भी आवश्यक हो जाता है कि दुनिया की शक्तियाँ उसके अनुभवों को गंभीरता से लें और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति विकसित करें।
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत की यह मुखरता न केवल सुरक्षा का प्रश्न है, बल्कि यह न्याय, मानवाधिकार और वैश्विक स्थिरता की भी मांग है।
Comments are closed.