भारत पर 50% टैरिफ से घिरे ट्रंप: रो खन्ना बोले, नीतियां भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को तोड़ रही हैं

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 3 सितंबर: भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में घेर दिया है। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना और अमेरिका के दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने ट्रंप की इस नीति को न केवल आर्थिक रूप से हानिकारक बताया है, बल्कि चेतावनी दी है कि यह कदम दशकों से बन रही भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को कमजोर कर रहा है।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर संकट

यूएस-इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष रो खन्ना ने कहा कि ट्रंप की नीतियां भारत-अमेरिका रिश्तों को पीछे धकेल रही हैं। उन्होंने कहा कि आयातित भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ और रूस से तेल खरीद पर 25% अतिरिक्त शुल्क न सिर्फ भारत को बल्कि अमेरिकी उत्पादकों और उपभोक्ताओं को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

खन्ना ने कहा, “हम दशकों में बनी साझेदारी को ट्रंप के अहंकार की वजह से नष्ट नहीं होने देंगे।”

रूस और चीन को भारत के करीब ला रही नीतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पर आर्थिक दबाव डालकर ट्रंप प्रशासन अनजाने में भारत को रूस और चीन के और करीब धकेल रहा है। यह अमेरिका की एशियाई रणनीति के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है।

विश्लेषकों ने कहा कि भारत, रूस और चीन का त्रिकोण मजबूत होना अमेरिका के भू-राजनीतिक हितों को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है।

भारत के निर्यात पर असर

भारत से अमेरिका को जाने वाले चमड़ा, कपड़ा और ऊर्जा क्षेत्र के निर्यात पर इन टैरिफ का सीधा असर पड़ा है। वहीं, अमेरिकी निर्यातकों को भी भारत में अपने उत्पादों की मांग घटने का खतरा है। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

नोबेल पुरस्कार विवाद की गूंज

रो खन्ना ने दावा किया कि इस पूरे विवाद की जड़ ट्रंप की व्यक्तिगत नाराज़गी से जुड़ी है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने से इनकार कर दिया था, जबकि पाकिस्तान ने ऐसा किया। इसी से ट्रंप-भारत रिश्तों में खटास बढ़ी।

रणनीतिक साझेदारी पर खतरा

पूर्व अधिकारियों ने भी चेतावनी दी है कि यदि ट्रंप प्रशासन अपनी नीति में बदलाव नहीं करता, तो भारत-अमेरिका रक्षा, प्रौद्योगिकी और आर्थिक सहयोग की दशकों पुरानी प्रगति ठप हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को समझना होगा कि भारत के साथ मजबूत रिश्ते एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अनिवार्य हैं।

 

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