भारत–अमेरिका ट्रेड डील को रणनीतिक ‘रीसेट’ मानकर अमेरिकी सांसदों का समर्थन

टैरिफ तनाव के बाद भारत–अमेरिका संबंधों में नई शुरुआत

  • अमेरिका के दोनों दलों के सांसदों ने भारत–अमेरिका ट्रेड डील का स्वागत किया
  • व्यापार, ऊर्जा और तकनीक सहयोग को मिलेगा बल
  • रूस से ऊर्जा निर्भरता घटाने में सहायक बताया गया समझौता
  • हिंद–प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद

समग्र समाचार सेवा
वॉशिंगटन। 03 फरवरी: अमेरिका और भारत के बीच हुए नए व्यापार समझौते को वॉशिंगटन में व्यापक राजनीतिक समर्थन मिला है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि यह समझौता दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के संबंधों के लिए एक रणनीतिक ‘रीसेट’ है, जिससे व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक सहयोग को नई गति मिलेगी।

राजा कृष्णमूर्ति: कठिन दौर के बाद जरूरी बदलाव

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने इसे दोनों देशों के लिए अहम मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि बड़े टैरिफ के कारण संबंधों में अनावश्यक तनाव आया था और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हुआ। यह समझौता उस अध्याय से आगे बढ़ने का अवसर देता है। उनका कहना था कि भारत एक मित्र लोकतांत्रिक देश और रणनीतिक साझेदार है, और व्यापार बढ़ने से कामगारों, कारोबार तथा नई तकनीकों को मजबूती मिलेगी।

स्टीव डेन्स: सभी पक्षों के लिए जीत

अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स ने इस डील को स्पष्ट जीत बताया। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि यह सही दिशा में बड़ा कदम है।

डेन्स ने कहा कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारतीय बाजार में अमेरिकी उत्पादों की पहुंच बढ़ने से खासकर कृषि क्षेत्र को लाभ होगा। ऊर्जा के संदर्भ में उन्होंने भारत द्वारा अमेरिका से तेल खरीद बढ़ाने को वैश्विक स्तर पर मजबूत संदेश बताया, हालांकि व्यापार संतुलन पर और काम की जरूरत भी रेखांकित की।

जिम रिश: रणनीतिक उपलब्धि

सीनेट की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष जिम रिश ने इसे बड़ी उपलब्धि कहा। उन्होंने भारत द्वारा व्यापार बाधाएं कम करने के फैसले का स्वागत किया और भारत को अमेरिका का करीबी साझेदार बताया।

रिश के अनुसार, भारत की अमेरिकी खरीद बढ़ाने की प्रतिबद्धता रूस की आक्रामक नीतियों के खिलाफ रणनीतिक रूप से मददगार है और यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के प्रयासों को बल देगी, क्योंकि इससे रूस के ऊर्जा क्षेत्र को समर्थन कम होगा।

लिंडसे ग्राहम: रूस पर दबाव बढ़ेगा

सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी इस समझौते को रूस पर दबाव की रणनीति से जोड़ा। उन्होंने कहा कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ रहा है और भारत इस रियायत का हकदार है। उनके मुताबिक, जब दबाव पर्याप्त होगा, तभी रूस बातचीत के लिए मजबूर होगा।

हिंद–प्रशांत सहयोग को गति

यह व्यापार समझौता ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और नई दिल्ली व्यापार, ऊर्जा और हिंद–प्रशांत क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों को उम्मीद है कि यह डील आर्थिक लाभ के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊंचाई देगी।

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