भारतीय मूल के सिंगापुरवासी को राष्ट्रीय सेवा से बचने पर हुई कैद

समग्र समाचार सेवा
सिंगापुर,21 मार्च।
एक भारतीय मूल के 28 वर्षीय सिंगापुरवासी, जिसने अपनी अनिवार्य राष्ट्रीय सेवा (NS) की जिम्मेदारी पूरी नहीं की, उसे 14 सप्ताह की जेल की सजा सुनाई गई है। यह सजा तब सुनाई गई जब उसकी अपील, जिसमें उसने अपनी सजा को पलटने की मांग की थी, सिंगापुर की अदालत ने खारिज कर दी।

नागेश्वरन, जो सिंगापुर में जन्मा था, वर्ष 2004 में अपनी मां और बहन के साथ भारत चला गया था, तब वह मात्र सात वर्ष का था। अदालत में सुनवाई के दौरान यह बताया गया कि नागेश्वरन के पिता, जो एक सिंगापुरवासी थे, ने उसे बचपन में ही छोड़ दिया था। इस स्थिति में उसकी मां ने भारत लौटने का फैसला किया, जहां यह परिवार लगभग दो दशकों तक रहा।

कानूनी विवाद तब खड़ा हुआ जब नागेश्वरन 2015 में 18 वर्ष का होने के बावजूद सिंगापुर लौटकर राष्ट्रीय सेवा (NS) पूरी करने में असफल रहा। सिंगापुर में, सभी पुरुष नागरिकों और स्थायी निवासियों के लिए 18 से 21 वर्ष की आयु के बीच राष्ट्रीय सेवा अनिवार्य है, जिसमें दो वर्षों तक सिंगापुर सशस्त्र बल (SAF), सिंगापुर नागरिक रक्षा बल (SCDF) या सिंगापुर पुलिस बल (SPF) में सेवा देना शामिल है।

नागेश्वरन के इस दायित्व को पूरा न करने की बात 2020 में सामने आई, जब उसने सिंगापुर लौटने की कोशिश की। वह तब तक भारत में 15 वर्षों से अधिक समय बिता चुका था, और उसका देश से बाहर रहने का परमिट 2004 में उसकी विदाई के तुरंत बाद समाप्त हो गया था। सिंगापुर के कानून के अनुसार, जो नागरिक या स्थायी निवासी राष्ट्रीय सेवा पूरी किए बिना देश छोड़ते हैं, उन्हें 21 वर्ष की आयु तक लौटकर अपनी सेवा पूरी करनी होती है। ऐसा न करने पर कठोर दंड, जैसे जुर्माना और जेल की सजा, हो सकते हैं।

अभियोजन पक्ष का तर्क था कि नागेश्वरन ने वर्षों तक जानबूझकर अपनी राष्ट्रीय सेवा की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। अदालत में नागेश्वरन ने दावा किया कि वह अपनी राष्ट्रीय सेवा की शर्तों से पूरी तरह अनजान था। उसने बताया कि जब वह सिंगापुर से गया था, तब वह बहुत छोटा था और उसके कानूनी और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी उसकी मां ने संभाली थी। इसके अलावा, उसने यह भी कहा कि उसका सिंगापुर की सरकारी एजेंसियों से कोई संपर्क नहीं था और उसे अपने राष्ट्रीय सेवा दायित्वों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान, नागेश्वरन ने अपनी गलती स्वीकार की और अपने दायित्वों को न निभाने पर खेद जताया। उसने कहा कि वह अपने देश की सेवा करना चाहता था, लेकिन भारत में लंबे समय तक रहने और स्पष्ट निर्देशों की कमी के कारण वह ऐसा नहीं कर सका।

हालांकि, अदालत ने उसके तर्कों को खारिज कर दिया और उसे राष्ट्रीय सेवा कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया। 2023 में, उसे मूल रूप से 16 सप्ताह की जेल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन इस साल की शुरुआत में उसने अपील दायर की। इस सप्ताह अदालत ने उसकी अपील को खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखा, हालांकि सजा को घटाकर 14 सप्ताह कर दिया गया।

इस फैसले ने प्रवासी सिंगापुरवासियों के बीच बहस छेड़ दी है, खासकर उन लोगों के बीच जिनके विदेशों में गहरे संबंध हैं। कुछ लोगों ने नागेश्वरन के पक्ष में तर्क दिया कि वह बहुत छोटा था जब वह सिंगापुर से गया था और उसे अपनी जिम्मेदारियों की गंभीरता का एहसास नहीं था। उनका मानना है कि इस मामले में नरमी बरती जानी चाहिए थी। वहीं, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय सेवा कानून को बनाए रखना आवश्यक है ताकि सभी नागरिकों के लिए समानता और अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके।

सिंगापुर की राष्ट्रीय सेवा व्यवस्था दशकों से देश की रक्षा और नागरिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जो लोग अपनी राष्ट्रीय सेवा की जिम्मेदारी पूरी नहीं करते, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नागेश्वरन के मामले में, अदालत ने एक सख्त संदेश देने की कोशिश की है कि राष्ट्रीय सेवा की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जबकि व्यक्तिगत परिस्थितियों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास किया गया है।

नागेश्वरन का मामला अकेला नहीं है। पिछले कई वर्षों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां सिंगापुरवासी बचपन में विदेश चले गए और बाद में राष्ट्रीय सेवा न निभाने के कारण कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। ये मामले भावनात्मक और कानूनी दोनों दृष्टि से जटिल होते हैं, और सरकार अब भी इस चुनौती से जूझ रही है कि कैसे यह सुनिश्चित किया जाए कि नागरिक अपनी राष्ट्रीय सेवा की जिम्मेदारियों को पूरी तरह समझें और उनका पालन करें।

नागेश्वरन के लिए, यह सजा राष्ट्रीय कर्तव्यों के महत्व की एक सख्त याद दिलाती है, खासकर उन नागरिकों के लिए जो लंबे समय तक विदेश में रहते हैं। यह मामला यह भी दर्शाता है कि व्यक्तिगत परिस्थितियों और कानूनी दायित्वों के बीच संतुलन बनाना कितना कठिन हो सकता है।

अब नागेश्वरन को 14 सप्ताह की जेल की सजा काटनी होगी। उनके वकीलों ने आगे किसी और अपील की संभावना पर कोई बयान नहीं दिया है। यह मामला राष्ट्रीय सेवा कानूनों की कठोरता और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उनकी प्रासंगिकता पर जारी बहस को उजागर करता है।

Comments are closed.