भारत के भविष्य की ऊर्जा: नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि के लिए ट्रांसमिशन आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाना

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,7 अप्रैल।
भारत का कम-कार्बन भविष्य की ओर संक्रमण उसके 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर आधारित है। इस दृष्टिकोण को साकार करने का प्रमुख आधार है—भारत की ट्रांसमिशन अवसंरचना—वह अदृश्य ग्रिड जो ऊर्जा को स्रोतों से उपभोक्ताओं तक पहुंचाता है। दुनिया में तीसरे सबसे बड़े बिजली उपभोक्ता के रूप में, भारत के पास 4 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक की ट्रांसमिशन लाइनें हैं। फिर भी, नवीकरणीय स्रोतों के बढ़ते समावेशन और सुरक्षित बिजली पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ट्रांसमिशन उद्योग का रणनीतिक पुनर्निर्माण और उन्नयन अनिवार्य है।

बिजली आपूर्ति प्रणाली के तीन आवश्यक घटक होते हैंउत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण। पारंपरिक और नवीकरणीय संयंत्रों से उत्पादित बिजली को घरों, उद्योगों और वाणिज्य तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी होती है। यह कार्य ट्रांसमिशन नेटवर्कों के माध्यम से होता है, जो हानियों को कम और कुशलता को अधिकतम करता है। इसलिए ट्रांसमिशन न केवल ऊर्जा पहुंचाने में, बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और आर्थिक विकास में भी केंद्रीय भूमिका निभाता है।

भारत धीरे-धीरे स्मार्ट ग्रिड की ओर बढ़ रहा है— ऐसा नेटवर्क जो स्वचालन, संचार और आईटी क्षमताओं के साथ वास्तविक समय में ऊर्जा प्रवाह को अनुकूलित कर सके। स्मार्ट ग्रिड उत्पादन और खपत को ट्रैक करते हैं और स्थिरता के लिए रीयल-टाइम समायोजन करते हैं। 765 केवी एसी ट्रांसमिशन लाइनें और हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) कॉरिडोर जैसी तकनीकें ऊर्जा अधिशेष और घाटे वाले क्षेत्रों के बीच निर्बाध शक्ति प्रवाह सुनिश्चित करती हैं।

भारत में ग्रिड एकीकरण की शुरुआत 1960 के दशक में राज्य ग्रिड्स से हुई, जो धीरे-धीरे पांच क्षेत्रीय ग्रिड्स में विकसित हुए। 1989 में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (POWERGRID) की स्थापना के साथ एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड का सपना आकार लेने लगा, जो अंततः 2019 में लेह-लद्दाख को जोड़ने के साथ पूरा हुआ। “एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक फ्रीक्वेंसी” के सिद्धांत ने राज्यों के बीच बिजली साझा करने की क्षमता, लोड बैलेंसिंग और ग्रिड स्थिरता को बहुत मजबूत किया है।

महानवत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम POWERGRID ने इस क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभी भी इसकी अधिकांश हिस्सेदारी सरकार के पास है और यह उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन अवसंरचना के निर्माण में अग्रणी है।

चुनौतियाँ जो अभी भी सामने हैं:

  • राइट ऑफ वे (RoW) समस्याएं: भूमि अधिग्रहण की धीमी प्रक्रिया और कानूनी अड़चनों से परियोजनाएं देरी का शिकार होती हैं। मुआवजे को लेकर विवाद भी अड़चनें बढ़ाते हैं।

  • आपूर्ति श्रृंखला बाधाएं: बोली की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से उपकरणों की कमी पैदा हुई है। चीन जैसे देशों से आवश्यक घटकों पर आयात प्रतिबंधों ने देरी को और बढ़ा दिया है।

  • पुरानी अवसंरचना: भारत का एक बड़ा हिस्सा, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, पुराने ग्रिड सिस्टम पर निर्भर है जिससे नुकसान अधिक और बार-बार बिजली कटौती की समस्या होती है।

  • बिजली हानि और चोरी: लंबी दूरी की ट्रांसमिशन लाइनों में प्रतिरोध और बिजली की चोरी से ऊर्जा और राजस्व दोनों की भारी हानि होती है।

  • RoW मुआवजा नीति में सुधार (2024): सरकार ने टॉवर बेस और कॉरिडोर क्षेत्र के भुगतान को दोगुना कर भूमि अधिग्रहण को अधिक व्यवहार्य बनाया है।

  • आपूर्ति श्रृंखला सशक्तिकरण: घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, विशेष रूप से CRGO स्टील जैसे रणनीतिक सामग्रियों के आयात को सुरक्षित किया जा रहा है।

  • अवसंरचना उन्नयन: मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क को AI-आधारित समाधान और उच्च तकनीकी उपकरणों से उन्नत किया जा रहा है।

  • नेटवर्क विस्तार: 2032 तक मौजूदा 4.9 लाख सर्किट किमी नेटवर्क को 6.5 लाख किमी तक विस्तारित करने की योजना है, जिससे दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचेगी।

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: आज 15% इंटरस्टेट नेटवर्क का संचालन निजी ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता (TSP) करते हैं, और यह आंकड़ा 50% तक बढ़ने की संभावना है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्य प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया से निजी निवेश आकर्षित कर रहे हैं।

  • पूरे देश में स्मार्ट ग्रिड को तेजी से अपनाना

  • जन-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना, ताकि पूंजी और विशेषज्ञता मिल सके

  • राज्यों में समान नीति लागू करना ताकि नियामकीय अड़चनें कम हों

  • AI, IoT और ब्लॉकचेन को जोड़ना, ताकि रीयल-टाइम ग्रिड प्रबंधन और पूर्वानुमान आधारित मरम्मत हो सके

भारत की ट्रांसमिशन ग्रिड सिर्फ एक पाइपलाइन नहीं है जिससे बिजली गुजरती है—यह ऊर्जा क्रांति की जीवनरेखा है। भारत जितनी तेजी से अपने हरित ऊर्जा लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है, उतनी ही जरूरत है मजबूत, कुशल और तकनीकी रूप से सक्षम ट्रांसमिशन प्रणाली की। इस क्षेत्र में नवाचार, निवेश और सुधार के साथ समर्थन करना यह सुनिश्चित करेगा कि भारत की ऊर्जा आकांक्षाएं मजबूती से जुड़ी और साकार हों।

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