समग्र समाचार सेवा
तेहरान, 16 जुलाई: इज़रायल और अमेरिका के हमलों के बाद भी ईरान पर संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब यूरोप के बड़े देश फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। अगर अगस्त के अंत तक परमाणु समझौते पर ठोस प्रगति नहीं होती तो संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध दोबारा लागू किए जा सकते हैं।
यूरोप का अल्टीमेटम
फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी ने ईरान को साफ संदेश दे दिया है कि अगर उसने परमाणु समझौते को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो उसे भारी प्रतिबंध झेलने होंगे। तीनों देशों के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधियों ने जर्मनी के मिशन में मुलाकात कर इस मुद्दे पर मंथन किया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी यूरोपीय विदेश मंत्रियों के साथ फोन पर बातचीत कर रणनीति पर चर्चा की।
अमेरिका की सख्ती
अमेरिका ने अपने बयान में दोहराया कि वह किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाजत नहीं देगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह सभी साझेदार देशों की साझा जिम्मेदारी है कि ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोका जाए। अमेरिका पहले भी कई बार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जता चुका है
2015 का समझौता और ट्रंप का फैसला
गौरतलब है कि ईरान ने 2015 में अमेरिका समेत ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौता किया था। इस समझौते का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना था ताकि वह हथियार न बना सके। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने इसे पर्याप्त सख्त न मानते हुए अमेरिका को इस समझौते से अलग कर लिया था, जिससे पश्चिमी देशों और ईरान के रिश्तों में फिर से तनाव पैदा हो गया
ईरान ने रखी अपनी शर्त
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिए हैं कि वह अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता फिर से शुरू कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने सुरक्षा की गारंटी मांगी है। अराघची ने कहा कि जब तक अमेरिका या इज़रायल से उसके परमाणु ठिकानों पर हमलों को लेकर भरोसेमंद गारंटी नहीं मिलती, तब तक आगे की बातचीत संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों ने समझौते तक पहुंचने की राह को और कठिन बना दिया है।
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