समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 21 दिसम्बर I – को राजधानी दिल्ली स्थित केशव कुंज में भारतीय इतिहास संकलन समिति, दिल्ली प्रांत द्वारा प्रांत कार्यकारिणी की बैठक एवं नव निर्वाचित कार्यकारिणी के अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, संकल्प और संगठनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। इस अवसर पर दिल्ली प्रांत समिति की नई कार्यकारिणी को हृदय की गहराइयों से बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं।दिल्ली प्रांत के पूर्व महासचिव ने संगठन के तीन वर्षों के विकास के कार्यों पर प्रकाश डाला। 
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में गठित यह नवीन कार्यकारिणी संगठन के कार्य को नई बुलंदियों तक ले जाने का कार्य करेगी। साथ ही निवर्तमान कार्यकारिणी के योगदान को भी भावपूर्ण शब्दों में स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि निवर्तमान कार्यकारिणी ने दिल्ली प्रांत में संगठनात्मक कार्य का जिस समर्पण और विस्तार के साथ संचालन किया, वही आधार अब नई कार्यकारिणी को और आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।
सभा में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया कि जहां तक संगठन का कार्य अब तक पहुँचा है, नव निर्वाचित कार्यकारिणी उसे और व्यापक स्वरूप प्रदान करेगी। यह केवल अपेक्षा नहीं, बल्कि एक साझा संकल्प है, जिसे सभी कार्यकर्ता मिलकर सिद्धि तक पहुँचाएँगे ।
आदरणीय भाई साहब डॉ. बालमुकुंद पांडेय जी की मार्गदर्शक छत्रछाया में संगठन अपने वैचारिक और रचनात्मक दायित्वों को और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाएगा—इस विश्वास को सभी वक्ताओं ने दोहराया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. बालमुकुंद पांडेय जी ने अपने संबोधन में कहा कि “हम सब अलग-अलग पृष्ठभूमि, अनुभव और परिस्थितियों से आए हैं। घर की सोच, समाज की धारा और बाहर की चुनौतियाँ हमें प्रभावित करती हैं, लेकिन संगठन हमें बिना टूटे, बिना भटके जोड़कर रखता है। यहाँ विश्वास, ईमानदारी और आपसी सम्मान ही शक्ति है। ” यह संगठन निस्वार्थ भाव से, दिल से काम करने वाले कार्यकर्ताओं का संगठन है। उन्होंने भारत में मजबूत वैचारिक “थिंक टैंक” तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि इतिहास लेखन एवं शोध के क्षेत्र में भारतीय दृष्टि को सशक्त करना समय की माँग है।
कार्यक्रम में संरक्षक प्रमुख देवी प्रसाद सिंह (जो 1979 से संगठन से जुड़े हैं), प्रो. धर्मा चंद चौबे, डॉ. निर्मल पांडेय (स्वागत एवं संचालन), डॉ. प्रवीन गर्ग सहित कई वरिष्ठ विद्वान एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. अजय सिंह द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।यह आयोजन न केवल संगठनात्मक बदलाव का प्रतीक रहा, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए वैचारिक स्पष्टता और सामूहिक संकल्प का सशक्त संदेश भी देकर गया।
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