समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29 अगस्त: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार देर रात टोक्यो (जापान) के लिए रवाना हुए। यह उनकी आधिकारिक दो दिवसीय यात्रा है, जहां वे 29 और 30 अगस्त को रहेंगे। इस दौरान वह 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मुलाकात करेंगे।
शिखर सम्मेलन का एजेंडा
इस वार्षिक बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत और जापान के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है और इस बैठक में दोनों देशों के बीच नए समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
मोदी और इशिबा की बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और सुरक्षा, उन्नत तकनीक में सहयोग और नवीन ऊर्जा परियोजनाओं पर विशेष फोकस रहेगा।
जापानी उद्योगपतियों से मुलाकात
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी टोक्यो में जापानी उद्योग जगत के नेताओं और निवेशकों से भी मिलेंगे। माना जा रहा है कि वह भारत में बुनियादी ढांचा, विनिर्माण और डिजिटल सेक्टर में जापानी निवेश को आकर्षित करने का आह्वान करेंगे।
भारत और जापान पहले से ही बुलेट ट्रेन परियोजना और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स पर साथ काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस दौरे के बाद इन परियोजनाओं की रफ्तार और तेज होगी।
अमेरिका-भारत संबंधों की पृष्ठभूमि
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर उच्च टैरिफ लगाया था, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि मोदी की जापान यात्रा न सिर्फ आर्थिक सहयोग बल्कि राजनयिक संतुलन की दृष्टि से भी अहम है।
चीन की ओर भी रुख
जापान यात्रा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को चीन जाएंगे, जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राज्य प्रमुखों की 25वीं बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक में रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के नेता शामिल होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि जापान और चीन की यात्राओं से भारत की एशिया में रणनीतिक भूमिका और मजबूत होगी।
मोदी का बयान
जापान रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विटर (X) पर लिखा:
“मुझे विश्वास है कि मेरी जापान और चीन की यात्राएँ हमारे राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं को मजबूत करेंगी और क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर शांति, सुरक्षा और सतत विकास के लिए उपयोगी सहयोग को बढ़ावा देंगी।”
प्रधानमंत्री मोदी की यह जापान यात्रा भारत-जापान संबंधों में नई ऊर्जा भर सकती है। जहां व्यापार और तकनीकी सहयोग से भारतीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, वहीं रक्षा और रणनीतिक समझौते भारत की एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भूमिका को और सशक्त करेंगे।
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