न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादला, आंतरिक जांच जारी

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,29 मार्च।
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह फैसला उस समय आया है जब होली समारोह के दौरान उनके आधिकारिक आवास पर आग लगने के बाद कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी मिलने के आरोपों की जांच चल रही है।

इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट के एक अन्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सी. डी. सिंह का भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादला किया गया था। यह कदम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद उठाया गया, जिसकी पुष्टि कानून मंत्रालय ने की है।

हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, न्यायमूर्ति वर्मा का तबादला सीधे तौर पर इस जांच से जुड़ा हुआ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके स्थानांतरण की सिफारिश पहले ही कर दी थी। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की याचिका खारिज कर दी है, यह कहते हुए कि जब तक आंतरिक जांच पूरी नहीं हो जाती, कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकती।

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब 22 मार्च को न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर आग लगने की घटना के बाद कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की खबरें सामने आईं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी. वाई. चंद्रचूड़ ने तीन सदस्यीय इन-हाउस कमेटी का गठन किया है, जो इन आरोपों की जांच करेगी।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों अभय ओका और उज्जल भूइयां की पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक आंतरिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो सीजेआई सरकार को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने या उनके पद से हटाने की सिफारिश कर सकते हैं

रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यायमूर्ति वर्मा इस सप्ताह जांच समिति के समक्ष पेश हो सकते हैं। इससे पहले, उन्होंने अपनी कानूनी रक्षा के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं सिद्धार्थ अग्रवाल, मेनका गुरुस्वामी, अरुंधति कटजू और वकील तारा नरूला से सलाह ली है। इन वकीलों को हाल ही में उनके लुटियंस दिल्ली स्थित आवास पर जाते हुए देखा गया।

इस मामले की अगली सुनवाई और जांच समिति की रिपोर्ट के नतीजे पर सभी की नजरें टिकी हैं। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह देश की न्यायिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मामला बन सकता है। वहीं, तबादले के फैसले को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि क्या यह जांच से जुड़ा कदम है या सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया।

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