श्री खाटू श्याम जी व सालासर बाला जी धाम के लिए पहली धार्मिक बस यात्रा

चंडीगढ़ से खाटू श्याम जी और सालासर बाला जी धाम के लिए पहली धार्मिक बस यात्रा रवाना, सतपाल जैन ने झंडा दिखाकर किया शुभारंभ।

समग्र समाचार सेवा
चंडीगढ़, 21 फरवरी :  शहर में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब भक्ति पथ यात्रा समूह द्वारा श्री खाटू श्याम जी मंदिर एवं श्री सालासर बाला जी धाम के दर्शनों के लिए पहली धार्मिक बस यात्रा का आयोजन किया गया। इस पावन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया सतपाल जैन ने।

भक्ति पथ यात्रा समूह का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अधिक से अधिक सनातन धर्म से जोड़ना तथा उन्हें भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति जागरूक करना है। समूह के सदस्यों ने बताया कि आगे भी प्रत्येक माह विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्राएं आयोजित की जाएंगी, ताकि समाज में भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार हो सके।

बस रवाना होने से पूर्व विधिवत पूजा-अर्चना और नारियल फोड़कर शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर देवेश मोदगिल, अनिल दुबे, श्री 1008 महामंडलेश्वर कमली माता, श्री सोनी गोयल, श्री भूपेंद्र शर्मा, श्री मुकेश गोयल, श्री ए.पी. शर्मा, श्री सिद्धार्थ मोदगिल और सुकेशा गोसाईं सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने यात्रियों को मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर प्रसिद्ध समाजसेवी सोनू सेठी (सेठी ढाबा वाले) ने अपने भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा परिसर “जय श्री श्याम” एवं “जय बाला जी” के जयकारों से गूंज उठा। साथ ही रात्रि भंडारे की सेवा की भी व्यवस्था की गई, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

यात्रा की व्यवस्थाओं में महिपाल खाती, पूनम कोठारी, बसवानंद भट्ट, अनिल गोयल, धीरज कुमार, तेजस्वी मठपाल, कीर्ति, कांति देवी, राजरानी और तरुणा ने विशेष योगदान दिया। सभी स्वयंसेवकों ने यात्रियों की सुविधा, भोजन और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा।

श्रद्धालुओं में इस धार्मिक यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। कई परिवारों ने इसे आध्यात्मिक अनुभव बताया और कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भक्ति पथ यात्रा समूह की यह पहली पहल सफल रही और आयोजकों ने भविष्य में और भी बड़े स्तर पर धार्मिक यात्राओं के आयोजन का संकल्प लिया। चंडीगढ़ से शुरू हुई यह आस्था की यात्रा निश्चित रूप से समाज को धर्म और संस्कृति के प्रति और अधिक जागरूक  करने का माध्यम बनेगी।

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