रक्षा मामलों को राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जा सकता: किरेन रिजिजू

चीनी घुसपैठ आरोप और नरवणे की किताब पर कांग्रेस के हंगामे पर केंद्रीय मंत्री का पलटवार

  • चीनी घुसपैठ के आरोपों पर कांग्रेस के रुख पर केंद्रीय मंत्री का कड़ा बयान
  • हेंडरसन ब्रूक्स-भगत रिपोर्ट का जिक्र, 1962 की हार का संदर्भ
  • चीन सीमा पर दिवाली मनाने का पुराना वीडियो किया साझा
  • नरवणे की किताब को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर हमला

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 6 फरवरी: केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस द्वारा चीनी घुसपैठ के आरोप और पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब को लेकर किए जा रहे हंगामे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि रक्षा मामलों को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि देश की मौजूदा सरकार एक अनुभवी नेतृत्व द्वारा चलाई जा रही है। उन्होंने 1962 के युद्ध के बाद बनी हेंडरसन ब्रूक्स–भगत आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट दशकों से गोपनीय रखी गई है, क्योंकि उसमें उस समय की सरकार की नीतिगत विफलताओं का उल्लेख था। इसके बावजूद मौजूदा सरकार ने कभी इसे राजनीतिक लाभ के लिए सार्वजनिक नहीं किया, क्योंकि रक्षा विषय राष्ट्रीय हित से जुड़े होते हैं।

सीमा दौरे का पुराना वीडियो साझा

अपने बयान के समर्थन में किरण रिजिजू ने एक पुराना वीडियो भी साझा किया, जिसमें वह चीन सीमा क्षेत्र में भारतीय सैनिकों के साथ नजर आ रहे हैं। यह वीडियो 1 नवंबर 2024 का है, जब वह सीमा पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने पहुंचे थे और वहां चीनी सैनिकों के साथ संवाद करते हुए भी दिखे थे।

निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर हमला

इस पूरे विवाद के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि नेहरू–गांधी परिवार की नीतियों, कार्यप्रणाली और उनसे देश को हुए नुकसान को लेकर वह एक विशेष पुस्तकालय स्थापित करना चाहते हैं।

अपने वीडियो संदेश में दुबे ने कहा कि संसद में दिए गए उनके वक्तव्य के बाद देशभर से प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिसके बाद उन्होंने इस पुस्तकालय की योजना बनाई। उनका कहना है कि सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक निर्णयों से जुड़े दस्तावेजों और पुस्तकों को एक ही स्थान पर रखा जाएगा, ताकि शोधार्थियों और आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की जानकारी मिल सके। उन्होंने लोगों से नेहरू–गांधी परिवार से जुड़ी पुस्तकों की जानकारी साझा करने की अपील भी की है।

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