पहलगाम हमले में स्थानीय भूमिका उजागर, NIA की कार्रवाई: दो गिरफ्तार

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 23 जून: पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले—जिसमें 26 पर्यटकों की कथित धार्मिक आधार पर हत्या की गई—के दो महीनों बाद NIA ने बड़ी सफलता हासिल की है। जांच एजेंसी ने पकड़ा है कि न केवल विदेशी आतंकियों में, बल्कि इस नरसंहार में दो स्थानीय व्यक्तियों का भी महत्वपूर्ण हाथ था। एनआईए ने हाल ही में परवेज अहमद जोथर और बशीर अहमद जोथर को गिरफ्तार किया, जिन्होंने हमले से पहले तीन पाकिस्तानी आतंकियों को भोजन, आश्रय और रैकी में सहयोग किया था। यह खुलासा स्थानीय सहयोग की पुष्टि करता है।

तीन पाकिस्तानी साजिशकर्ताओं की हो चुकी पहचान

एनआईए की पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि पहलगाम हमला Lashkar-e-Taiba के तीन आतंकवादियों ने अंजाम दिया था। इसमें एक पूर्व पाकिस्तानी SSG कमांडो भी शामिल था। स्थानीय आरोपी परवेज और बशीर ने खुलासा किया कि उन्होंने आतंकियों को Hill Park के छप्परछावनी स्थल पर रखा, भोजन कराया और रैकी में मदद की। उनके सहयोग से एनआईए उन आतंकियों तक पहुँची, जो अब तक फरार हैं।

16 लोगों के घायल होने के साथ हुई थी नृशंस हत्या

22 अप्रैल को Baisaran घाटी में हुए इस हमले में 26 लोग मारे गए और 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। हमलावरों ने शॉटप्वाइंट पर धार्मिक पहचान के आधार पर निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया था, जिससे घाटी का पर्यटन अचानक ठप पड़ गया । हालांकि अब, पर्यटन स्थलों पर लोग लौट रहे हैं।

गिरफ्तारियों से मिले पुख्ता सबूत और आगे की जांच

एनआईए ने परवेज और बशीर को UAPA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। जांच में यह जानकारी सामने आई कि हमले से पहले वे आतंकी झोपड़ियों में रहते थे और उनसे पैसे भी लेकर मिले थे । एनआईए अभी उन आतंकियों की पहचान, उनकी ISI या स्थानीय अन्य नेटवर्क से संबंध और आगे की दिशा की जांच कर रही है।

ऑपरेशन सिंदूर और पाक विरोधी सख्ती

पहलगाम हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को अपनी जवाबी कार्रवाई—ऑपरेशन सिंदूर—की घोषणा की, जिसमें पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया। तब से लश्कर और ISI के साथ आरोपों की जांच हो रही है। एनआईए की यह नई गिरफ्तारी जांच में निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

 

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