समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 4 सितंबर: जहां केंद्र सरकार ने आम जनता के लिए कई जरूरी सामानों पर जीएसटी दर घटाकर राहत दी है, वहीं लॉटरी और ऑनलाइन मनी गेम्स से जुड़े उद्योगों को बड़ा झटका दिया है। जीएसटी काउंसिल ने इन गतिविधियों को अब “स्पेशल टैक्स स्लैब” में डालते हुए उन पर 40% जीएसटी लगाने का ऐलान किया है।
पहले 28%, अब सीधा 40% टैक्स
अब तक लॉटरी, कैसीनो, ऑनलाइन बेटिंग, हॉर्स रेसिंग और अन्य मनी गेम्स पर 28% टैक्स लागू था। लेकिन अब इन्हें ‘सिन गुड्स’ (Sin Goods) की श्रेणी में डाल दिया गया है। खास बात यह है कि इस बार इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का प्रावधान भी शामिल किया गया है।
केरल पर सबसे बड़ा असर
भारत में लॉटरी का सबसे बड़ा बाजार केरल है। देश के कुल लॉटरी राजस्व का लगभग 97% हिस्सा केरल से आता है। अनुमान है कि केरल में हर साल करीब ₹14,000 करोड़ का लॉटरी कारोबार होता है, जिसमें से लगभग ₹3,000 करोड़ टैक्स और केवल ₹450 करोड़ लाभ के रूप में बचता है। अब टैक्स दर 40% होने से न सिर्फ मुनाफा घटेगा बल्कि बिक्री पर भी असर पड़ेगा।
केरल नेताओं और ट्रेड यूनियनों की चिंता
अगस्त के अंतिम हफ्ते में केरल के सांसदों, विधायकों और ट्रेड यूनियन नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिला था। उन्होंने अपील की थी कि लॉटरी को ‘लग्जरी’ या ‘सिन गुड्स’ की श्रेणी में न रखा जाए। उनका तर्क था कि:
- लॉटरी कोई लक्ज़री प्रोडक्ट नहीं है।
- यह राज्य सरकारों के लिए वैध आय का स्रोत है।
- लाखों लोगों की रोज़गार इस उद्योग से जुड़ा है।
टिकट की कीमतें फिर बढ़ेंगी
इतिहास गवाह है कि टैक्स बढ़ने का सीधा असर टिकट की कीमतों और बिक्री पर पड़ता है।
- 2017: जीएसटी लागू हुआ तो लॉटरी पर 12% टैक्स लगा।
- 2020: टैक्स बढ़कर 28% हुआ। टिकट ₹30 से बढ़कर ₹40-50 में मिलने लगा।
- नतीजा: बिक्री घटी और उपभोक्ता की रुचि कम हुई।
अब 40% टैक्स लागू होने पर एक बार फिर टिकट की कीमतों में उछाल और बिक्री में गिरावट तय मानी जा रही है।
उद्योग में चिंता और भविष्य की चुनौतियाँ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उद्योग पर दबाव और बढ़ेगा। जहां सरकार को टैक्स से तात्कालिक राजस्व बढ़ सकता है, वहीं लंबी अवधि में यह फैसला उपभोक्ताओं की दिलचस्पी घटाकर कारोबार को नुकसान पहुंचा सकता है।
जीएसटी काउंसिल का यह फैसला सरकार की “राजस्व बढ़ाओ” नीति का हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन इसका सबसे बड़ा झटका लॉटरी उद्योग को लगेगा। खासकर केरल जैसे राज्यों में, जहां करोड़ों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी है, वहां आने वाले समय में इस फैसले से राजनीतिक और आर्थिक हलचल तेज होना तय है।
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