अमेरिका में कोरोना काल जैसा मार्केट क्रैश, भारत में भी हाहाकार… ये 4 कारण मंदी का खौफ पैदा कर रहे हैं
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,4 अप्रैल। अमेरिका के शेयर बाजारों में हाल ही में आई भारी गिरावट ने निवेशकों को 2020 के कोरोना काल की याद दिला दी है। इस बार भी हालात चिंताजनक हैं और इसका असर भारत समेत वैश्विक बाजारों में साफ दिख रहा है। भारतीय निवेशकों में भी घबराहट है और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि कुछ ठोस वजहें हैं, जो इस बार मंदी के खौफ को और गहरा बना रही हैं।
अमेरिका में एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर दबाव में है। कुछ मिड-साइज और रीजनल बैंकों के डूबने की खबरों ने बाजार को झकझोर दिया है। निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है, जिससे स्टॉक मार्केट में भारी बिकवाली हो रही है। बैंकिंग संकट की आशंका के चलते फेडरल रिजर्व की नीतियों पर भी दबाव बढ़ गया है।
अमेरिका में महंगाई दर लगातार अपेक्षा से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ना तय है। ब्याज दरें बढ़ने से लोन महंगे होंगे, जिससे निवेश और खपत दोनों पर असर पड़ेगा। भारत में भी आरबीआई को इसी दिशा में कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब और कारोबारी गतिविधियों पर पड़ेगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और अब मिडल ईस्ट में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ रहा है, जिससे भारत जैसे आयात-आधारित देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना तय है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
विदेशी निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। इससे बाजार में दबाव बढ़ रहा है। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता जा रहा है, जिससे आयात महंगा हो रहा है और महंगाई का खतरा बढ़ रहा है। निवेशकों का विश्वास डगमगा रहा है और घरेलू बाजार में भी घबराहट का माहौल बनता जा रहा है।
फिलहाल भारतीय बाजार में स्थिरता लाने के लिए सरकार और आरबीआई को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराने की बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं। हालांकि अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो भारत में भी मंदी का खतरा गहराता जा सकता है।
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