समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29 अगस्त: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में आरएसएस के शताब्दी समारोह के दौरान कहा कि धर्मांतरण और अवैध प्रवास जनसांख्यिकीय असंतुलन के मुख्य कारण हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार अवैध प्रवास को रोकने के लिए प्रयासरत है, लेकिन समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
भागवत ने कहा कि धर्म का चुनाव व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद है, लेकिन इसमें किसी भी प्रकार का प्रलोभन, दबाव या ज़बरदस्ती नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जबरन धर्मांतरण न सिर्फ सामाजिक संतुलन बिगाड़ता है बल्कि राष्ट्रहित के खिलाफ भी है।
अवैध प्रवास और नौकरियों का मुद्दा
आरएसएस प्रमुख ने अवैध प्रवासियों के विषय में कहा कि किसी भी देश के पास सीमित संसाधन होते हैं और ऐसे में बाहरी लोगों को नौकरियों का लाभ देना गलत है। उन्होंने कहा,
“नौकरियों का लाभ अवैध प्रवासियों को नहीं, बल्कि अपने नागरिकों को मिलना चाहिए, जिसमें मुसलमान भी शामिल हैं।”
भागवत का यह बयान उन परिस्थितियों में आया है, जब सीमावर्ती राज्यों और महानगरों में अवैध प्रवासियों की मौजूदगी को लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है।
समाज की जिम्मेदारी भी जरूरी
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि केवल सरकार ही इस समस्या का हल नहीं कर सकती। समाज को भी जागरूक होकर अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा,
“घुसपैठ एक गंभीर मुद्दा है। हर देश के अपने नियम और सीमाएं होती हैं। अगर हम वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा को मानते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम अनुशासन छोड़ दें।”
भागवत के अनुसार, हर नागरिक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रोजगार और संसाधनों का लाभ पहले भारतीय नागरिकों को मिले।
धर्मांतरण पर संघ की स्पष्ट राय
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि धर्मांतरण अगर व्यक्तिगत इच्छा से हो तो उस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, लेकिन अगर इसमें प्रलोभन, धोखा या दबाव हो तो यह न केवल गलत बल्कि अस्वीकार्य है। उन्होंने जोर दिया कि भारत की एकता और विविधता तभी सुरक्षित रह सकती है जब धार्मिक स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदारी और ईमानदारी से हो।
जनसांख्यिकीय असंतुलन पर चिंता
भागवत ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में जनसांख्यिकीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण और अवैध प्रवास से यह संतुलन प्रभावित हो रहा है, जो आने वाले समय में सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान भारतीय राजनीति और समाज में एक महत्वपूर्ण विमर्श को जन्म देता है। जहां एक ओर सरकार अवैध प्रवास और जबरन धर्मांतरण को रोकने की दिशा में काम कर रही है, वहीं भागवत का संदेश है कि समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस समस्या का हल ढूंढने में सहयोग करना चाहिए।
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