पूर्वोत्तर में कृषि-बागवानी मूल्य श्रृंखला मजबूत करने पर जोर, उच्च स्तरीय कार्य बल की बैठक में सिंधिया शामिल

उत्पाद-विशिष्ट और क्लस्टर-आधारित रणनीति से किसानों की आय बढ़ाने पर बनी सहमति

  • कृषि-बागवानी उत्पादों की विशेषज्ञता, गुणवत्ता और बाजार विविधता को बनाया जाएगा पहचान का आधार
  • कटाई के बाद नुकसान कम करने और विपणन-रसद लागत घटाने पर विशेष फोकस
  • राज्य-वार प्राथमिक उत्पादों की पहचान कर क्लस्टर-आधारित विकास को बढ़ावा
  • अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक योजनाओं से मूल्य श्रृंखला एकीकरण का रोडमैप

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 24 दिसंबर: केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित कृषि एवं बागवानी की उच्च स्तरीय कार्य बल (एचएलटीएफ) बैठक में भाग लिया। बैठक का आयोजन सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की अध्यक्षता में किया गया।

बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, असम के कृषि मंत्री अतुल बोरा, अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गैब्रियल डी. वांगसू, सिक्किम के कृषि मंत्री पूरन कुमार गुरुंग, एमडीओएनईआर के सचिव तथा केंद्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एचएलटीएफ ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में कृषि एवं बागवानी मूल्य श्रृंखलाओं और बाजार संबंधों में मौजूद प्रमुख कमियों को दूर करने पर व्यापक चर्चा की। बैठक का उद्देश्य क्षेत्र की अंतर्निहित ताकत—उत्पाद विशेषज्ञता, गुणवत्ता और अनूठी पहचान—का लाभ उठाते हुए कृषि-बागवानी इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना रहा।

उत्पादन से लेकर कटाई-उपरांत प्रक्रियाओं, प्रसंस्करण, विपणन और रसद तक की कड़ियों में मौजूद बाधाओं के व्यवस्थित निदान, हस्तक्षेपों की प्राथमिकता और उपयुक्त निवेश तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी। किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना तथा विपणन और रसद लागत घटाना प्रमुख फोकस क्षेत्र के रूप में उभरा।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि मूलभूत हस्तक्षेपों से लेकर पूर्ण पैमाने पर मूल्य श्रृंखला एकीकरण तक स्पष्ट कार्ययोजना आवश्यक है। इसके तहत निर्यात-तत्परता के लिए रणनीतिक अवसंरचना ढांचा, प्रत्येक राज्य के लिए प्राथमिक वस्तुओं की पहचान और प्रत्येक चयनित उत्पाद के लिए क्लस्टर-आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि पैमाना, दक्षता और बाजार संरेखण सुनिश्चित हो सके।

एक खाका-आधारित दृष्टिकोण पर सहमति बनी, जिसमें किसी एक उत्पाद के चयन से शुरुआत कर उसके लिए स्पष्ट अल्पकालिक, मध्यम-अवधि और दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में उत्पाद-वार किसानों की संख्या का आकलन, राज्य-वार लाभों का मूल्यांकन और लागू उपायों के बाद किसानों की आय में वृद्धि को मापने पर जोर रहेगा।

एचएलटीएफ ने दोहराया कि उत्पाद-विशिष्ट और क्लस्टर-संचालित रणनीति से मापनीय और टिकाऊ परिणाम हासिल होंगे, बाजार संबंध मजबूत होंगे और पूर्वोत्तर क्षेत्र के किसानों की दीर्घकालिक आय वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।

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