काग़ज़ से ज़मीन तक दिखा बदलाव, 50 हज़ार स्वास्थ्य संस्थान गुणवत्ता मानकों पर खरे

मरीज-केंद्रित सेवाओं की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि

  • 50,373 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को मिला गुणवत्ता प्रमाणन
  • 2015 में सीमित स्तर से शुरू हुई पहल का देशव्यापी विस्तार
  • वर्चुअल मूल्यांकन से प्रमाणन प्रक्रिया में आई तेज़ी
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को मिला मजबूत आधार

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 7 जनवरी: देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र ने एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। आज़ादी के अमृत महोत्सव काल में भारत ने 50,373 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों के अनुरूप प्रमाणित कर लिया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ अब केवल संख्या में नहीं, बल्कि गुणवत्ता के स्तर पर भी मज़बूत हो रही हैं।

सीमित शुरुआत से व्यापक विस्तार

गुणवत्ता सुधार की यह पहल वर्ष 2015 में कुछ चुनिंदा जिला अस्पतालों के साथ शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में इसका दायरा सीमित था, लेकिन समय के साथ इसे उप-जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिर–प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तारित किया गया। इससे प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक सेवाओं में एकरूप गुणवत्ता सुनिश्चित हो सकी।

तकनीक से बढ़ी रफ्तार

हाल के वर्षों में वर्चुअल मूल्यांकन प्रणाली ने प्रमाणन प्रक्रिया को तेज़ बनाने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2023 के अंत तक जहाँ प्रमाणित संस्थानों की संख्या कुछ हज़ार थी, वहीं अगले दो वर्षों में इसमें कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्तमान आँकड़ों के अनुसार, इनमें अधिकांश आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं, जबकि माध्यमिक स्तर के अस्पतालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

नीति और प्रबंधन का समन्वय

यह प्रगति स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के तहत क्षमता निर्माण, डिजिटल साधनों के उपयोग और प्रशिक्षित मूल्यांकनकर्ताओं की तैनाती ने इस प्रक्रिया को मजबूत आधार दिया है।

नागरिकों को सस्ती और सुरक्षित सेवाएँ

एनक्यूएएस प्रमाणन का उद्देश्य हर नागरिक को सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच गुणवत्ता का अंतर कम हुआ है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में ठोस कदम बढ़े हैं।

आगे की तैयारी

सरकार ने आने वाले समय के लिए भी लक्ष्य तय किए हैं। मार्च 2026 तक बड़ी संख्या में शेष सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को गुणवत्ता मानकों के तहत लाने की योजना है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता एक स्थायी पहचान बन सके।

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