NRC की आशंका पर ममता बनर्जी का अल्पसंख्यकों को संदेश: “सिर्फ ईद पर नहीं, वोटर बनकर स्थायी रूप से बंगाल लौटें”

समग्र समाचार सेवा
इलमबाजार, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, 30 जुलाई: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने राज्य के अल्पसंख्यक प्रवासी समुदाय के लिए एक बड़ा और भावनात्मक संदेश दिया है। बीरभूम के इलमबाजार में मंगलवार को आयोजित एक जनसभा में उन्होंने कहा कि लोग केवल त्योहारों जैसे ईद पर ही न आएं, बल्कि स्थायी रूप से बंगाल में लौटकर वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करवाएं

“NRC की आड़ में मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश”

मुख्यमंत्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नए मतदाता पंजीकरण के नाम पर देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने का प्रयास है और सभी वास्तविक नागरिकों को वोटर लिस्ट में अपने नाम दर्ज करवाने चाहिए

उन्होंने कहा, “अगर आपका नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो यह आपके खिलाफ एक साजिश है और इसके खिलाफ आवाज़ उठाना आपका संवैधानिक अधिकार है।”

युवाओं से की सीधी अपील

ममता बनर्जी ने 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले छात्रों से भी अपील की कि वे जल्द से जल्द वोटर पंजीकरण कराएं। उन्होंने इसे युवाओं की संवैधानिक सुरक्षा का आधार बताया।

“जो भी छात्र 18 वर्ष के हो रहे हैं, वे अपना नाम वोटर लिस्ट में जरूर जुड़वाएं। अगर किसी का नाम छूटता है, तो हमारी सरकार उसे न्याय दिलाएगी।”

असम NRC का उदाहरण देते हुए जताई चिंता

सीएम बनर्जी ने असम में लागू NRC का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में 17 लाख से अधिक लोग अंतिम सूची से बाहर रह गए थे। उन्होंने बताया कि इन लोगों में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और नेपाली समुदाय के 7 लाख से ज़्यादा लोग शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि, “इनमें से कई लोगों को डिटेंशन कैंपों में बंद कर दिया गया है। ये लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है।”

हरियाणा-गुरुग्राम में डिटेंशन कैंप बनाने का दावा

बनर्जी ने यह भी दावा किया कि हरियाणा और गुरुग्राम में दस डिटेंशन सेंटर बनाए जा चुके हैं और असम में हजारों लोग पहले से ही ऐसे शिविरों में नजरबंद हैं।

2026 चुनावों पर भी नजर

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की यह अपील आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र भी बेहद अहम मानी जा रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि 2021 में जीती गई 215 सीटों से एक अधिक यानी 216 सीटें 2026 में जीतने का लक्ष्य तय करें।

ममता बनर्जी का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों मोर्चों पर स्पष्ट संकेत देता है। एक ओर वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की बात कर रही हैं, तो दूसरी ओर केंद्र सरकार की नागरिकता संबंधी नीतियों पर सवाल उठा रही हैं। आगामी चुनावों से पहले यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गर्माया हुआ नजर आ रहा है।

 

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