ऑपरेशन सिंदूर पर संत महात्माओं का PM मोदी और सेना को आभार, जून में दिल्ली में होगा बड़ा कार्यक्रम

समग्र समाचार सेवा,

नई दिल्ली, 27 मई: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारतीय सेना ने जिस साहस और पराक्रम के साथ पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, उससे देश के आम नागरिकों के साथ-साथ संत महात्मा भी गर्व महसूस कर रहे हैं। इस उपलब्धि को समर्पित एक बड़ा कार्यक्रम जून के पहले सप्ताह में नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद आयोजित करेगी।

इस कार्यक्रम में देश भर के विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों से जुड़े प्रमुख संत महात्मा शामिल होंगे। कार्यक्रम के माध्यम से न केवल प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया जाएगा, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के लिए विशेष प्रार्थनाएं भी की जाएंगी।

जून के पहले सप्ताह में होगा आयोजन

सन्यासियों के निरंजनी अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने बताया कि यह कार्यक्रम जून के पहले सप्ताह में नई दिल्ली में होगा। इसमें संतों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात करेगा और उनका आभार व्यक्त करेगा। इसके साथ ही वे तीनों सेनाओं के प्रमुखों को यह संदेश देंगे कि पूरा देश उनके शौर्य और पराक्रम से गर्वित और आभारी है।

संत महात्मा करेंगे कश्मीर यात्रा

स्वामी कैलाशानंद गिरि ने बताया कि दिल्ली के कार्यक्रम के बाद सभी संत महात्मा कश्मीर के लिए प्रस्थान करेंगे। वहां वे आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों के साथ खड़े होने का संदेश देंगे और देश की रक्षा में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प भी साझा करेंगे।

कश्मीर में मंदिरों और आश्रमों को पुनः खोलने की मांग

कैलाशानंद गिरि ने यह भी कहा कि संत महात्मा कश्मीर में बंद पड़े या प्रभावित मठ मंदिरों और आश्रमों को फिर से खोलने की मांग करेंगे। उनका मानना है कि इनके संचालन की जिम्मेदारी अखाड़ों और संत महात्माओं को ही दी जानी चाहिए, जिससे न केवल संचालन बेहतर होगा बल्कि घाटी में अल्पसंख्यक हिंदुओं का विश्वास भी मजबूत होगा। इसके साथ ही उन्होंने पारंपरिक रूप से निरंजनी अखाड़े को कैलाश मानसरोवर यात्रा की छड़ी सौंपने का अधिकार वापस देने की भी मांग की है।

यह आयोजन न केवल ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न होगा, बल्कि देश की एकता और सेना के प्रति आम और धार्मिक समुदाय के समर्थन को भी दर्शाएगा।

 

 

 

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