गणतंत्र दिवस परेड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झलक, कर्तव्य पथ से दुनिया को मिला भारत की सैन्य शक्ति का संदेश
कर्तव्य पथ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गूंज, तीनों सेनाओं की एकजुट ताकत का भव्य प्रदर्शन
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वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का ध्वज दिखाकर सैन्य सफलता को किया रेखांकित
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थलसेना, नौसेना और वायु सेना की संयुक्त झांकी में दिखा बेहतरीन तालमेल
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ब्रह्मोस, आकाश और एस-400 प्रणाली ने दिखाई भारत की बहुस्तरीय रक्षा क्षमता
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स्वदेशी ड्रोन और आधुनिक युद्ध प्रणालियों ने तकनीकी आत्मनिर्भरता का संदेश दिया
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 26 जनवरी: गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में इस वर्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ विशेष आकर्षण के रूप में सामने आया। वायु सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा अभियान का ध्वज प्रदर्शित किया गया, जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक सैन्य कार्रवाई की याद दिलाई।
तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी में दिखी एकजुटता
परेड में सशस्त्र बलों की ट्राई-सर्विसेज झांकी प्रस्तुत की गई, जिसकी थीम ‘ऑपरेशन सिंदूर: एकजुटता से विजय’ रही। इस झांकी में भारतीय थलसेना, नौसेना और वायु सेना के बीच मजबूत समन्वय और साझा रणनीति को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर ने दिखाई रणनीतिक योजना
झांकी में इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर के माध्यम से यह दिखाया गया कि किस तरह राष्ट्रीय नेतृत्व और सैन्य कमान की योजनाबद्ध रणनीति के तहत ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया। सेनाओं के आपसी तालमेल और स्थानीय नागरिकों के सहयोग को इस अभियान की सफलता की प्रमुख वजह बताया गया।
‘विरासत, विविधता और विकास’ का संतुलन
ऑपरेशन सिंदूर की पहचान के रूप में ‘विरासत, विविधता और विकास’ के संतुलन को रेखांकित किया गया। जहां ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार किए, वहीं आकाश मिसाइल प्रणाली और एस-400 वायु रक्षा नेटवर्क ने ‘सुदर्शन चक्र’ अवधारणा के तहत नागरिकों को मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया।
स्वदेशी तकनीक और आधुनिक युद्ध प्रणाली का प्रदर्शन
कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट्स खंड में शक्तिबाण और दिव्यास्त्र प्लेटफॉर्म्स को शामिल किया गया। उच्च गतिशीलता वाले वाहनों पर तैनात ये प्रणालियां सेना के स्वदेशीकरण और तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाती हैं।
ड्रोन तकनीक से बढ़ी सटीक युद्ध क्षमता
शक्तिबाण और दिव्यास्त्र में झुंड आधारित ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी हाइब्रिड तकनीक को प्रदर्शित किया गया, जो तोपखाने की फायरिंग दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म सटीक हमले और प्रभावी युद्ध संचालन को संभव बनाते हैं।
ऑपरेशनल तैयारी और पेशेवर दक्षता का प्रमाण
परेड के दौरान शक्तिबाण वाहन की कमान 161 मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट रमन मिश्रा ने संभाली, जबकि दिव्यास्त्र वाहन का नेतृत्व सूबेदार किरण मेदार ने किया। यह भारतीय सेना की उच्च स्तरीय ऑपरेशनल तैयारी और अनुशासन को दर्शाता है।
आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक संदेश
उल्लेखनीय है कि मई 2025 में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया था। यह सैन्य कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।
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