समग्र समाचार सेवा
पटना, 24 जुलाई: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक टकराव अपने चरम पर पहुंच चुका है। विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच लगातार तीखी बहस हो रही है। कांग्रेस विधायक शकील अहमद खां ने इसे संविधानिक अधिकारों पर हमला बताया, तो वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे भाजपा और नीतीश सरकार की मिलीभगत करार दिया।
शकील अहमद ने कहा कि वोट के अधिकार को छीनने की कोशिश की जा रही है और दलित-पिछड़ों के मतों को हटाने की योजना पर काम हो रहा है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें विपक्ष की आगे की रणनीति का अंदाज़ा नहीं है।
तेजस्वी ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विधानसभा में अपनी बात रखते हुए सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि घुसपैठियों की बात है तो यह विफलता नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों की है, क्योंकि वे लंबे समय से सत्ता में हैं।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम काटने की योजना के पीछे राजनीतिक मंशा है और अगर यह नहीं रुकी तो विपक्ष चुनाव बहिष्कार का निर्णय ले सकता है। इस बयान ने सदन की राजनीति को और गर्म कर दिया है
विधानसभा में हंगामा और नोकझोंक
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भाजपा और राजद विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी पर तंज कसते हुए कहा, “तुम तो उस समय बच्चे थे”, वहीं राजद के भाई वीरेंद्र ने कह दिया कि “सदन किसी के बाप का नहीं है”।
विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने इस पर नाराज़गी जताते हुए दोनों पक्षों को संयम बरतने की नसीहत दी। लेकिन उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा इस टिप्पणी पर माफी की मांग पर अड़े रहे, जिसपर अध्यक्ष ने खुद उन्हें झाड़ते हुए कहा, “सदन मैं चलाऊंगा, आप नहीं।”
विपक्षी रणनीति में भाजपा को असहज करने की कोशिश
राजद ने भाजपा नेताओं के बीच हुई झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर विधानसभा के अंदर विपक्षी रणनीति को स्पष्ट कर दिया है। सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के पुराने वीडियो भी वायरल किए गए हैं, ताकि भाजपा को घेरने की पूरी योजना बनाई जा सके।
विधानसभा सत्र समाप्ति की ओर है, लेकिन अब तक किसी पूर्व निर्धारित विषय पर विपक्ष द्वारा कोई ठोस चर्चा नहीं की गई। गुरुवार को भी विपक्ष ने सदन में मौजूद रहने के बजाय राजनीतिक संदेश देने को प्राथमिकता दी, जिससे आने वाले चुनावों की तस्वीर और स्पष्ट होती जा रही है।
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