मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का बड़ा कदम
चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक असहमति और वोटर लिस्ट रिवीजन विवाद के बीच विपक्षी दल संसद में लाएंगे महाभियोग प्रस्ताव।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन संसद के दोनों सदनों में नया महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।
- यह पूरा विवाद चुनाव आयोग के भीतर दो अन्य आयुक्तों द्वारा मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराने की मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया है।
- विपक्षी दलों ने सीईसी पर एकतरफा फैसले लेने और चुनावी प्रक्रिया की निष्वपक्षता को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 25 सितंबर: देश की राजनीति में उस वक्त एक नया भूचाल आ गया जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने लामबंद होकर मोर्चा खोल दिया। विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से हटाने के लिए एक नया महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion) लाने की गंभीर तैयारी कर रहे हैं। इस राजनीतिक सरगर्मी के पीछे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सामने आई अंदरूनी असहमति की खबरें मुख्य वजह बताई जा रही हैं।
क्या है पूरा विवाद और अंदरूनी असहमति का मामला?
हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर अपनी औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों में मुख्य रूप से मतदाता सूचियों से नाम हटाने, जोड़ने, फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव और केंद्रीय स्तर पर चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए। इन खुलासों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए इसे संवैधानिक संस्था की स्वायत्तता पर सीधा हमला करार दिया है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्था के भीतर इस तरह की असहमति और एकतरफा फैसले देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए ठीक नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि संस्था के भीतर चर्चा के दौरान अलग-अलग विचार होना एक सामान्य प्रक्रिया है और सभी अंतिम निर्णय कानूनी प्रावधानों के तहत ही लिए गए हैं। बहरहाल, संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर भारी हंगामा होने के पूरे आसार हैं।
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