उपराष्ट्रपति ने डॉ. सी. पलानीवेलु की आत्मकथा ‘पालनिवेलु गट्स’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया

अच्छा समाज बनाने के लिए व्यक्तिगत प्रयासों को पहचानना ज़रूरी-उपराष्ट्रपति

  • उपराष्ट्रपति ने पुस्तक को साहस, अनुशासन और नैतिक नवोन्मेष की प्रेरक कहानी बताया
  • लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी में डॉ. पलानीवेलु के अग्रणी योगदान की सराहना
  • हिंदी संस्करण को समाज के बड़े वर्ग तक प्रेरक जीवन यात्रा पहुँचाने वाला बताया
  • समाज को लौटाने और गुरुओं के प्रति कृतज्ञता की परंपरा पर विशेष ज़ोर

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 20 जनवरी: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने प्रसिद्ध सर्जन डॉ. सी. पलानीवेलु की आत्मकथा पालनिवेलु गट्स के हिंदी संस्करण का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं से भरा होने के बावजूद एक रहा है और साझा मूल्यों के कारण हमेशा एक रहेगा।

सर्जरी क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान

उपराष्ट्रपति ने कहा कि डॉ. पलानीवेलु ने ऐसे समय में लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी को अपनाया, जब भारत में यह तकनीक प्रारंभिक चरण में थी। वर्ष 1991 में कोयंबटूर में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की शुरुआत कर उन्होंने दक्षिण भारत में पहला ऐसा केंद्र स्थापित किया, जिसने सर्जिकल पद्धतियों को नई दिशा दी।

आत्मकथा केवल सफलता की नहीं, संघर्ष की कहानी

पुस्तक के शीर्षक का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आत्मकथा केवल एक सफल चिकित्सक की कहानी नहीं है, बल्कि साधारण पृष्ठभूमि से उठकर अनुशासन, परिश्रम और नैतिक मूल्यों के सहारे आगे बढ़ने की प्रेरक यात्रा है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्तिगत प्रयासों और अनुकरणीय योगदान को पहचान नहीं मिलती, तब तक अच्छा समाज नहीं बन सकता।

हिंदी संस्करण का विशेष महत्व

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदी संस्करण का विमोचन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हिंदी भाषी पाठकों तक यह प्रेरक जीवन कथा पहुँचेगी और युवा पीढ़ी बड़े सपने देखने तथा ईमानदारी से कार्य करने के लिए प्रेरित होगी।

समाज को लौटाना हर व्यक्ति का दायित्व

डॉ. पलानीवेलु द्वारा दूरदराज़ क्षेत्रों में सर्जनों के प्रशिक्षण और कम लागत वाली सर्जिकल तकनीकों के विकास की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि समाज को वापस देना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने गुरुओं के सम्मान में पुरस्कार स्थापित करने की परंपरा को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का सशक्त उदाहरण बताया।

इस अवसर पर रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह, नेशनल मेडिकल कमीशन के अध्यक्ष डॉ. अभिजात सेठ, इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. डॉ. जे. एस. राजपूत तथा जीईएम हॉस्पिटल ग्रुप के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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