‘आराम से ऊपर सम्मान और भय से ऊपर स्वतंत्रता’ नेताजी का जीवन दर्शन-उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन
आज़ाद हिंद फौज ने स्वतंत्रता संग्राम को दिया नया मार्ग: उपराष्ट्रपति
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कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित हुआ पराक्रम दिवस समारोह
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उपराष्ट्रपति ने नेताजी पर आधारित पुस्तक का किया विमोचन
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आईएनए से जुड़ी दुर्लभ स्मृतियों की विशेष प्रदर्शनी का लोकार्पण
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नेताजी के आदर्शों को युवाओं के लिए बताया मार्गदर्शक
समग्र समाचार सेवा
कोलकाता, 24 जनवरी। उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कोलकाता स्थित विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में आयोजित पराक्रम दिवस समारोह में भाग लेते हुए कहा कि “आराम से ऊपर सम्मान और भय से ऊपर स्वतंत्रता” नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन का मूल मंत्र था।
उन्होंने कहा कि पराक्रम दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में साहस, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का संचार करने का अवसर है।
आराम त्याग कर राष्ट्र को चुना
उपराष्ट्रपति ने नेताजी के उस ऐतिहासिक निर्णय को याद किया जब उन्होंने भारतीय सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित नौकरी को त्यागकर देश की पूर्ण स्वतंत्रता का मार्ग चुना। उन्होंने कहा कि आज़ाद हिंद फौज का गठन कर नेताजी ने स्वतंत्रता संग्राम को एक वैकल्पिक और निर्णायक दिशा दी।
दक्षिण भारत से नेताजी का गहरा संबंध
उपराष्ट्रपति ने कहा कि नेताजी का जुड़ाव देश के हर क्षेत्र से रहा, विशेष रूप से दक्षिण भारत से। उन्होंने तमिलनाडु के विभिन्न जिलों से जुड़े भारतीय राष्ट्रीय सेना के सैनिकों के योगदान को राष्ट्र के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
उपराष्ट्रपति ने कहा कि नेताजी का जीवन आज के युवाओं को भय से ऊपर उठकर राष्ट्र की जिम्मेदारी लेने और प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में कार्य करने की प्रेरणा देता है।
पुस्तक विमोचन और स्मृतियों की प्रदर्शनी
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने श्री सी.वी. आनंद बोस द्वारा लिखित पुस्तक “पिताजी की यादें” का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तिगत संस्मरण नेताजी के जीवन को मानवीय दृष्टि से समझने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान नेताजी से जुड़ी दुर्लभ स्मृति वस्तुओं की विशेष प्रदर्शनी का भी लोकार्पण किया गया, जिसमें उनका फाउंटेन पेन, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और आज़ाद हिंद फौज के पदक शामिल थे। उपराष्ट्रपति ने इन्हें साहस, अनुशासन और राष्ट्रनिर्माण की भावना का प्रतीक बताया।
गणमान्य जनों की उपस्थिति
समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद के महानिदेशक श्री अरिजीत दत्ता चौधरी, विक्टोरिया मेमोरियल हॉल के सचिव श्री अनुराग कुमार, भारतीय संग्रहालय कोलकाता के निदेशक श्री सायन भट्टाचार्य सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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