भारतीय इतिहास संकलन योजना समिति, दिल्ली प्रान्त:‘विभाजन विभीषिका’ पर विशेष व्याख्यान

भारतवर्ष के विभाजन के दौरान महिलाओं के हिंसा के त्रासद अनुभव’

समग्र समाचार सेवा 
नई दिल्ली, 12 अगस्त : भारतीय इतिहास संकलन योजना समिति, दिल्ली प्रान्त एवं माधव संस्कृति न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘नामूलं लिख्यते किञ्चित्’ व्याख्यानमाला के अंतर्गत मंगलवार को ‘विभाजन विभीषिका : भारतवर्ष के विभाजन के दौरान महिलाओं के हिंसा के त्रासद अनुभव’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन आज 11 अगस्त 2026 को सायं पाँच बजे से अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के केंद्रीय कार्यालय, साधना, सप्तम तल, केशव कुंज, झण्डेवालां, नई दिल्ली स्थित सभागार में हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. रीना कपूर ने प्राथमिक और मौलिक स्रोतों सहित फ़ील्ड स्टडी और मौखिक स्रोतों के आधार पर आधारित अपना व्याख्यान ‘Interrogating Gender and Faith: Women’s Experiences of Violence during the Partition of Bhāratavarṣa’ विषय पर प्रस्तुत किया।
मुख्य वक्ता डॉ. रीना कपूर, (असिस्टेंट प्रोफेसर, दयाल सिंह सांध्य कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने विभाजन के दौरान महिलाओं के अनुभवों, हिंसा, विस्थापन तथा सामाजिक-सांस्कृतिक त्रासदी के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि भारतवर्ष के विभाजन का इतिहास केवल राजनीतिक सीमाओं के पुनर्निर्धारण का इतिहास नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में असंख्य परिवारों, विशेषकर महिलाओं की पीड़ा, संघर्ष और अस्मिता से जुड़ी मानवीय कहानियाँ भी हैं।
इससे पूर्व कार्यक्रम का आरंभ श्री आकाश अवस्थी, (अध्येता, हिन्दू अध्ययन केंद्र, दिल्ली विश्वविद्यालय) द्वारा मंगलाचरण से हुआ। विषय प्रवर्तन डॉ. अभिषेक प्रियदर्शी, (असिस्टेंट प्रोफेसर, कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय) द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. रजनीश शुक्ल ( पूर्व कुलपति, MGAHV, ईवीएम प्रोफेसर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय) ने भारत विभाजन के ज़िम्मेदार तत्वों को रेखांकित करते हुए, वर्तमान परिस्थितियों में भी उन्हीं चुनौतियों से रूबरू राष्ट्र को सतर्क रहने/रखने हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. शिवकुमार मिश्र, (प्रोफेसर, इतिहास विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली) ने विभाजन की घटनाओं को व्यापक ऐतिहासिक और मानवीय परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अजय कुमार सिंह, (असिस्टेंट प्रोफेसर, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निर्मल पाण्डेय ने किया।
इस अवसर पर छह दर्जन से ज़्यादा की संख्या में इतिहास एवं सामाजिक विज्ञान के अध्येता, शिक्षक, शोधार्थी तथा इतिहास-चिंतक उपस्थित रहे। कार्यक्रम अपने उद्देश्य ‘विभाजन के इतिहास में महिलाओं के अनुभवों को केंद्र में लाते हुए हिंसा, आस्था, अस्मिता और स्मृति के विविध पक्षों पर गंभीर अकादमिक विमर्श को सामने लेन में सफल रहा, और इस ड्राइव को और आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम के गायन के साथ हुआ।

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