स्थायी सुख का मार्ग: मास्टर जी की प्रेरणा से नीडोनॉमिक्स को नई ऊर्जा

कुरुक्षेत्र, 30 नवम्बर: “जीवन जीने की कला से मृत्यु की कला तक—हैप्पीनेस गैरेन्टीड” जैसी गहन जीवन-दर्शन को आज नई ऊँचाई मिली, जब स्थायी सुख के संदेशवाहक व आधुनिक आध्यात्मिक मार्गदर्शक मास्टर जी ने नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ़ थॉट (  एनएसटी  ) के प्रवर्तक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व तीन बार कुलपति एवं सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर प्रो. मदन मोहन गोयल के कुरुक्षेत्र स्थित घर पहुँचे । उनके साथ उनकी समर्पित टीम की सदस्य सुश्री श्रुति जुनेजा भी उपस्थित रहीं।
इस आत्मीय संवाद के दौरान, मास्टर जी का संदेश नीडोनॉमिक्स के मूल सिद्धांतों से गहराई से जुड़ा दिखाई दिया, जिसने आध्यात्मिक ज्ञान और सामाजिक-आर्थिक दर्शन को एक साझा मंच प्रदान किया।
मास्टर जी की प्रमुख शिक्षाएँ और एनएसटी से उनका सामंजस्य
• आंतरिक बनाम बाह्य खुशी
मास्टर जी क्षणिक, बाहरी आधार पर मिलने वाली खुशी और स्थायी, आंतरिक आनंद के बीच स्पष्ट भेद बताते हैं। उनका कहना है कि वास्तविक सुख आत्मबोध, अंतर्मन की स्पष्टता और स्वयं की वास्तविक प्रकृति को समझने से उत्पन्न होता है—जो नीडोनॉमिक्स के लोभ-मुक्त, आवश्यकता-आधारित जीवन के संदेश से पूर्णतः मेल खाता है।
• “जीने की कला” ही “मरने की कला”
उनकी शिक्षाओं का केंद्रीय भाव है कि समझदारी से जीना ही निर्भयता से मरने की तैयारी है। जब व्यक्ति अपने भीतर शांति, भावनात्मक संतुलन और जीवन के द्वंद्वों को स्वीकार करने की क्षमता विकसित कर लेता है, तो मृत्यु सहित हर चुनौती का सामना समानता और स्थिरता से करता है। यह बात नीडोनॉमिक्स के उस सिद्धांत से मेल खाती है कि सजग जीवन ही टिकाऊ कल्याण का आधार है।
• मिशन 800 करोड़
मास्टर जी का वैश्विक मिशन 800 करोड़ हर मानव तक स्थायी सुख का सत्य पहुँचाने का प्रयास है। यह आंदोलन ऐसी जागृत मानवता का निर्माण करना चाहता है जहाँ दबाव की जगह शांति और भ्रम की जगह स्पष्टता हो।
• आध्यात्मिक जागरण और “जीवन का खेल”
उनकी शिक्षाओं में जीवन को एक “खेल” बताया गया है जिसके वास्तविक नियम हैं—जागरूकता, स्वीकृति और आंतरिक स्वतंत्रता। ये ही गुण जीवन को बिना भावनात्मक उतार-चढ़ाव के जीने में मदद करते हैं। यह नीडोनॉमिक्स की उस सोच से जुड़ता है जो भौतिक आवश्यकताओं और नैतिक-सजग जीवन के बीच संतुलन पर जोर देती है।
कुरुक्षेत्र में ज्ञान का संगम


प्रो. गोयल ने मास्टर जी के मिशन की सराहना की और कहा कि  एनएसटी  के उन सिद्धांतों को और मज़बूत करता है जो नैतिक अर्थशास्त्र, आंतरिक स्थिरता और मूल्य-आधारित जीवन को बढ़ावा देते हैं। इस आत्मीय भेंट ने यह रेखांकित किया कि अच्छा जीना और अच्छा मरना एक कालजयी सिद्धांत है, जिसे विश्वभर की दार्शनिक परंपराएँ मान्यता देती आई हैं—और जिसे आज मास्टर जी आधुनिक, सरल और सबके लिए समझने योग्य रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
बैठक का समापन इस सामूहिक समझ के साथ हुआ कि स्थायी सुख कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक, प्राप्त करने योग्य अवस्था है, जो व्यक्ति और समाज—दोनों को ऊँचा उठाती है।
जो भी व्यक्ति मास्टर जी की शिक्षाओं के बारे में अधिक जानना चाहता है, वह MAAsterG समुदाय के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और ऑनलाइन प्रवचनों का लाभ उठा सकता है, जहाँ यह रूपांतरणकारी संदेश पूरे विश्व में प्रसारित किया जा रहा है।

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