श्रम, प्रकृति और कृतज्ञता भारतीय पर्वों का मूल भाव: पीएम मोदी

पर्व हमें एकता, आशा और सकारात्मकता की दिशा में आगे बढ़ाते हैं: पीएम मोदी

  • प्रधानमंत्री ने तीन प्रमुख कृषि पर्वों पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं
  • किसानों, श्रम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को बताया भारतीय संस्कृति की आत्मा
  • पोंगल को तमिल परंपरा और भाषा की विरासत का प्रतीक बताया
  • माघ बिहू को संतोष, भाईचारे और उदारता का उत्सव कहा

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली। 14 जनवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू के अवसर पर देशवासियों के नाम संदेश जारी करते हुए कहा कि श्रम, मर्म और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ही भारतीय पर्वों की आत्मा है। उन्होंने कहा कि ये पर्व केवल परंपराएँ नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को सुदृढ़ करने वाले अवसर हैं।

संक्रांति: नए संकल्प और सकारात्मकता का संकेत

प्रधानमंत्री ने कहा कि संक्रांति सूर्य की गति में परिवर्तन के साथ नए आरंभ और आशा का प्रतीक है। देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नामों और रूपों में मनाया जाने वाला यह पर्व हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है और लोगों को एक सूत्र में बाँधने का कार्य करता है।

किसानों के प्रति आभार का भाव

पीएम मोदी ने अपने संदेश में किसानों और उनके परिवारों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये पर्व हमें उन हाथों के प्रति कृतज्ञ बनाते हैं, जो समाज को पोषण प्रदान करते हैं। संक्रांति आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर देखने और सामूहिक समृद्धि की भावना को मजबूत करती है।

पोंगल: श्रम और प्रकृति की लय का उत्सव

पोंगल को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पर्व कृषि, ग्रामीण जीवन और परिश्रम की गरिमा से गहराई से जुड़ा हुआ है। परिवारों द्वारा एक साथ मिलकर पारंपरिक व्यंजन तैयार करना, खुशी साझा करना और परंपराओं को आगे बढ़ाना पीढ़ियों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करता है।

उन्होंने पोंगल को तमिल संस्कृति का गौरव बताते हुए कहा कि यह पर्व अब वैश्विक स्वरूप ले चुका है और विश्वभर में तमिल समुदाय इसे उत्साह के साथ मना रहा है।

माघ बिहू: संतोष और भाईचारे का प्रतीक

माघ बिहू पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह असमिया संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है, जो फसल कटाई के समापन के साथ संतोष और कृतज्ञता का भाव उत्पन्न करता है। यह किसानों की मेहनत के सम्मान के साथ-साथ समाज में उदारता, आपसी देखभाल और भाईचारे को बढ़ावा देता है।

प्रधानमंत्री ने अंत में कामना की कि ये सभी पर्व देशवासियों के जीवन में शांति, अच्छा स्वास्थ्य, खुशहाली और सामाजिक सद्भाव लेकर आएँ तथा आने वाला समय समृद्धि और सफलता से परिपूर्ण हो।

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