- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पृथ्वी को जीवन की पालन-पोषण करने वाली माता मानने वाला संस्कृत सुभाषित साझा किया।
- उन्होंने मानवता से पृथ्वी के साथ सद्भाव में रहने और उसकी नैतिक व्यवस्था का सम्मान करने की अपील की।
- मोदी ने संस्कृत श्लोक “विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥” पोस्ट किया।
- संदेश में पृथ्वी के संरक्षण और मानवीय जिम्मेदारी पर बल दिया गया।
- प्रधानमंत्री के इस पोस्ट की सोशल मीडिया पर सराहना हो रही है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 6 अगस्त : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए पृथ्वी को माता के रूप में सम्मान देने की भारतीय परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि मानवता को पृथ्वी के साथ सद्भाव में रहना चाहिए, क्योंकि पृथ्वी समस्त जीवन का पालन-पोषण करती है और उसकी नैतिक व्यवस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने संस्कृत का श्लोक पोस्ट किया—
“विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्।
शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥”
इस संदेश के जरिए उन्होंने पृथ्वी के संरक्षण और मानवता की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया, जिसे सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
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