पुलिस स्मृति दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया
रक्षा मंत्री ने पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बलों के बलिदान को किया नमन; बोले – “सेना और पुलिस दोनों ही राष्ट्र सुरक्षा के स्तंभ हैं”
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1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में शहीद हुए 10 वीर पुलिसकर्मियों की याद में मनाया जाता है ‘पुलिस स्मृति दिवस’।
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रक्षा मंत्री ने कहा – “देश की सामाजिक अखंडता की रक्षा पुलिस करती है, भौगोलिक अखंडता की सेना।”
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नक्सलवाद पर बोले – “मार्च 2026 तक यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।”
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मोदी सरकार ने पुलिस आधुनिकीकरण के लिए आधुनिक हथियार, ड्रोन और डिजिटल सिस्टम उपलब्ध कराए हैं।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर:पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। यह दिवस 1959 की उस घटना की स्मृति में मनाया जाता है, जब लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों के हमले में 10 भारतीय पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए थे।
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना और पुलिस दोनों ही राष्ट्रीय सुरक्षा के दो मजबूत स्तंभ हैं , एक देश की सीमाओं की रक्षा करता है, जबकि दूसरा समाज और उसकी आंतरिक सुरक्षा को संभालता है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए बाहरी और आंतरिक सुरक्षा में संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज देश के सामने नई तरह की चुनौतियाँ हैं , सीमा पर अस्थिरता, आतंकी खतरे, संगठित अपराध और विचारधारात्मक युद्ध। उन्होंने पुलिस बल की सराहना करते हुए कहा कि अगर देशवासी चैन की नींद सो रहे हैं तो वह हमारे सतर्क पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों के कारण है।
नक्सलवाद पर बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह समस्या अब अंतिम चरण में है। “कभी जो इलाके ‘रेड कॉरिडोर’ के नाम से जाने जाते थे, आज वे ‘ग्रोथ कॉरिडोर’ बन चुके हैं,” उन्होंने कहा।
रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के प्रयासों की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि 2018 में सरकार ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक स्थापित किया, ताकि पुलिस के योगदान को उचित सम्मान मिले। साथ ही पुलिस को आधुनिक हथियार, ड्रोन, सर्विलांस सिस्टम, फॉरेंसिक लैब्स और डिजिटल तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने पुलिस और समाज के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, “जब समाज और पुलिस एक-दूसरे को समझते और सहयोग करते हैं, तभी सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत बनती है।”
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार, गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो प्रमुख तपन डेका, बीएसएफ महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर CAPFs और दिल्ली पुलिस का संयुक्त परेड भी आयोजित किया गया।
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