समग्र समाचार सेवा
रायबरेली, 12 सितंबर: राजनीति में अक्सर आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बयानबाजी देखने को मिलती है, लेकिन कभी-कभी ऐसे पल भी सामने आते हैं जो मानवीय भावनाओं से भरे होते हैं। रायबरेली दौरे पर गए कांग्रेस सांसद और नेता विपक्ष राहुल गांधी की एक ऐसी ही तस्वीर ने सोशल मीडिया पर चर्चा बटोरी है।
दरअसल, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के दो दिवसीय दौरे का भाजपा द्वारा विरोध किया जा रहा था। इस विरोध में सबसे आगे भाजपा नेता और मंत्री दिनेश प्रताप सिंह थे। हाल ही में दिशा की बैठक के दौरान राहुल और दिनेश प्रताप सिंह के बीच तीखी बहस भी हुई थी। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा था कि यह देश और रायबरेली की प्रतिष्ठा का सवाल है और उन्होंने राहुल गांधी की उपस्थिति पर सवाल उठाए थे।
लेकिन विरोध और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा। दिनेश प्रताप सिंह का बेटा पीयूष प्रताप सिंह राहुल गांधी के पास आशीर्वाद लेने गया। इस दौरान राहुल गांधी और पीयूष प्रताप सिंह ने हाथ मिलाकर गर्मजोशी दिखाई, जबकि पास खड़े दिनेश प्रताप सिंह मुस्कुराते दिखे। यह क्षण दर्शाता है कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मानवीय रिश्ते और सम्मान हमेशा मौजूद रह सकते हैं।
रायबरेली में आज राहुल गांधी से हाथ मिलाते पीयूष प्रताप सिंह हैं, जो उस दिनेश प्रताप सिंह के पुत्र है जो कल राहुल गांधी के विरोध में सड़क पर फैले हुए थे।वैसे ध्यान से देखें, दूर दिनेश प्रताप भी झुके जा रहे हैं। यह है लीचड़ बीजे के पाई। pic.twitter.com/SmzOzVnEZ6
— PANKAJ CHATURVEDI 🇮🇳 (@PC70001010) September 11, 2025
राजनीति में खुशियों के पल
UP की राजनीति में विरोधी नेताओं के बीच कभी-कभी हाथ मिलाना या सकारात्मक बातचीत करना कोई नई बात नहीं है। लेकिन दिनेश प्रताप सिंह और राहुल गांधी के बीच दिशा बैठक में हुई तीखी तकरार के बाद यह तस्वीर और भी खास बन जाती है। राजनीतिक तनाव के बावजूद, पिता-पुत्र और विपक्षी नेता के बीच यह क्षण लोगों के दिल को छू गया।
राहुल गांधी का रायबरेली दौरा और विरोध
लोकसभा चुनाव 2024 में राहुल गांधी ने रायबरेली और वायनाड दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जीतकर आए। नतीजे आने के बाद उन्होंने रायबरेली सीट अपने पास रखी और वायनाड से प्रियंका गांधी सांसद बनीं। हाल ही में राहुल गांधी जब दो दिवसीय वायनाड दौरे पर रायबरेली पहुंचे, तो उनका बीजेपी कार्यकर्ताओं और दिनेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में विरोध हुआ। विरोध के दौरान नारेबाजी और तीखी टिप्पणियाँ देखने को मिलीं।
दिनेश प्रताप सिंह की राजनीतिक यात्रा
दिलचस्प है कि तल्ख बयानबाजी और विरोध के इस दौर के बावजूद, दिनेश प्रताप सिंह खुद कभी कांग्रेस में थे। साल 2019 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए। अब पिता-पुत्र और विपक्षी नेता के बीच यह मानवीय पल यह साबित करता है कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मानवीय रिश्तों की गरिमा हमेशा बनी रहती है।
इस तस्वीर और पल ने राजनीति के कड़वे रंगों के बीच भी मानवीय भावनाओं को सामने लाकर एक सकारात्मक संदेश दिया है।
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