उत्तर प्रदेश में जून से बिजली की दरें बढ़ाने की तैयारी

समग्र समाचार सेवा

लखनऊ, 3 अप्रैल। पेट्रोलडीजलसीएनजी तथा गैस सिलेंडर के लगातार बढ़ते दामों के बाद अब उत्तर प्रदेश के लोगों को बिजली का झटका लगेगा। माना जा रहा है कि सरकार जून से बिजली महंगी कर सकती है। विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों से दस दिन में स्लैबवार टैरिफ प्रस्ताव मांगा है।

सभी श्रेणियों की बिजली दरें बढ़ सकती हैं

उत्तर प्रदेश में सिंचाई को छोड़कर घरेलू सहित अन्य सभी श्रेणियों की बिजली दरें बढ़ सकती हैं। सरकार ने सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में देने की घोषणा की थीइसी कारण किसानों को राहत है। सरकार का बिजली विभाग में 6700 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई करने के लिए मौजूदा दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है।

भाजपा सरकार बनने के बाद उत्तराखंड में बिजली हुई महंगी

भाजपा की दोबारा नई सरकार बनते ही उत्तराखंड में बिजली महंगी होने के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी बिजली की दरें बढऩे की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। प्रदेश में सिंचाई छोड़कर घरेलू सहित अन्य सभी श्रेणियों की बिजली दरों में अब थोड़ी-बहुत बढ़ोत्तरी तय मानी जा रही है। बढ़ी हुई दरें जून से लागू हो सकती हैं।

1.20 लाख मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली खरीदी जानी है

18वीं विधानसभा के गठन के लिए मतदान खत्म होते ही बिजली कंपनियों के आठ मार्च को मौजूदा वित्तीय वर्ष 2022 -23 के लिए दाखिल 85,500 करोड़ रुपये एआरआर (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) प्रस्ताव का अध्ययन कर विद्युत नियामक आयोग ने स्लैबवार टैरिफ प्रस्ताव मांगा था। प्रदेशवासियों को बिजली आपूर्ति के इस बार 65 हजार करोड़ रुपये से लगभग 1.20 लाख मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली खरीदी जानी है।

कंपनियों ने एआरआर में लगभग 6700 करोड़ रुपये का गैप बताया

मौजूदा बिजली दर से मिलने वाले राजस्व और खर्च का अनुमान लगाते हुए कंपनियों ने एआरआर में लगभग 6700 करोड़ रुपये का गैप बताया है। आयोग ने कंपनियों से गैप की बिना सब्सिडी भरपाई के लिए अलग-अलग श्रेणीवार बिजली की प्रस्तावित दरों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। आयोग ने प्रस्ताव में और भी कमियां गिनाते हुए कंपनियों से दस दिन में उन सब पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

घटाई जाए मौजूदा बिजली दर

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि बिजली की दरें बढऩे के बजाय घटनी चाहिए। उन्होंने बताया कि विद्युत उपभोक्ताओं का पूर्व में बिजली कंपनियों पर 20,500 करोड़ रुपये निकलने के एवज में बिजली दर कम करने संबंधी उनकी याचिका पर नियामक आयोग ने पावर कारपोरेशन से जवाब-तलब कर रखा है।

बिजली कार्मिकों के घर मीटर न लगाने पर जवाब-तलब

आयोग ने बिजली कंपनियों से सभी विभागीय कार्मिकों (श्रेणी-एलएमवी-10) के घर अभी तक मीटर न लगाए जाने पर भी जवाब-तलब किया है। उल्लेखनीय है कि सभी बिजली कार्मिक के घर मीटर लगाने का आदेश आयोग ने पहले भी दिया थालेकिन कार्मिकों ने लगातार इसका विरोध किया। आयोग ने एआरआर प्रस्ताव में और भी जिन प्रमुख कमियों को गिनाया गया है उनमें उसने बिजली खरीद में अंतर पर भी सवाल उठाया है। 

Comments are closed.