रक्षा विनिर्माण में निजी भागीदारी जल्द 50 प्रतिशत से अधिक होगी : राजनाथ सिंह

आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की ओर बड़ा कदम, निजी क्षेत्र को मिलेगी निर्णायक भूमिका

  • रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य
  • घरेलू रक्षा उत्पादन 46,425 करोड़ से बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचा
  • निजी क्षेत्र के योगदान से रक्षा निर्यात 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर
  • पूरी तरह स्वचालित गोला-बारूद संयंत्र और पिनाका रॉकेट निर्यात को नई गति

समग्र समाचार सेवा
नागपुर, महाराष्ट्र । 19 जनवरी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को शीघ्र ही 50 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुँचाना है। उन्होंने यह बात महाराष्ट्र के नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में मध्यम कैलिबर गोला-बारूद निर्माण सुविधा के उद्घाटन के अवसर पर कही।

गोला-बारूद संकट से आत्मनिर्भरता तक

रक्षा मंत्री ने उन दिनों को याद किया जब गोला-बारूद की कमी के कारण देश की रक्षा तैयारियाँ प्रभावित होती थीं। उन्होंने कहा कि उसी दौर ने भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

स्वदेशीकरण की ठोस नीति

राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र को सशक्त बनाने और घरेलू विक्रेताओं को प्रोत्साहित करने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है। प्लेटफॉर्म, प्रणाली और उपप्रणालियों को चरणबद्ध तरीके से स्वदेशी बनाया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पूर्ण निर्माण संभव नहीं है, वहाँ भी न्यूनतम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से कई रक्षा क्षेत्रों में स्वदेशी सामग्री का स्तर बढ़ा है और निजी उद्योग का मनोबल मजबूत हुआ है।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि

रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन 46,425 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया है। इसमें 33,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान निजी क्षेत्र का है।

उन्होंने कहा कि निजी भागीदारी के कारण रक्षा निर्यात में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। एक दशक पहले जो निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से कम था, वह अब बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है।

निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन

राजनाथ सिंह ने सोलर कंपनी द्वारा विकसित ‘भार्गवस्त्र’ काउंटर ड्रोन प्रणाली के सफल परीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह निजी क्षेत्र की तकनीकी दक्षता और नवाचार का प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि इस संयंत्र में विकसित पिनाका रॉकेटों का निर्यात प्रारंभ हो चुका है, जिससे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता और अधिक सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि तेजी से निर्यातक राष्ट्र बन रहा है।

बदलती युद्ध प्रकृति और तैयारी

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राष्ट्र के लिए आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, शुल्क, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना भी संघर्ष के नए आयाम बन चुके हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी स्थिति में एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार अत्यंत आवश्यक है और विनिर्माण तथा अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी समय की मांग है।

पूरी तरह स्वचालित संयंत्र

रविवार को उद्घाटित यह संयंत्र पूरी तरह स्वचालित है, जहाँ 30 मिमी गोला-बारूद का निर्माण किया जाता है। इसका उपयोग भारतीय सेना और नौसेना द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है।
रक्षा मंत्री ने पिनाका रॉकेट निर्माण संयंत्र का भी निरीक्षण किया और निर्देशित पिनाका रॉकेटों की पहली खेप को आर्मेनिया के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.