प्रो. एम. एम. गोयल ने सीएनएमएस –नमो केंद्र राष्ट्रीय संगोष्ठी में नीडोनॉमिक्स और नारी शक्ति को विकसित भारत के स्तंभ बताया

नई दिल्ली, 18 जून:  प्रो. एम. एम. गोयल ने भारतीय महिलाओं से विकसित भारत के निर्माण हेतु नीडोनॉमिक्स को अपनाने का आह्वान किया। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पूज्य माता आदरणीया माँ हीराबेन की 102वीं जयंती के उपलक्ष्य में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर , नई दिल्ली में सेंटर फॉर नरेंद्र मोदी स्टडीज (सीएनएमएस–नमो केंद्र) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी “महिला-नेतृत्वित विकास” में, तीन बार कुलपति रह चुके एवं नीडोनॉमिक्स विचारधारा के प्रणेता प्रो. मदन मोहन गोयल ने  सम्मानित अतिथि  के रूप में  प्रेरणादायक संबोधन दिया।

अनु-गीता के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रो. गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके श्रेष्ठ कर्मों के लिए जीवन-मुक्त व्यक्तित्व की संज्ञा दी। श्रद्धा के प्रतीक रूप में, उन्होंने अनु-गीता की एक प्रति सीएनएमएस के अध्यक्ष प्रो. जसीम मोहम्मद को प्रधानमंत्री तक प्रेषित करने हेतु भेंट की।

सीएनएमएस –नमो केंद्र के अध्यक्ष प्रो. जसीम मोहम्मद ने स्वागत भाषण दिया, जबकि डॉ. आमना मिर्जा ने कार्यक्रम का संचालन किया। मुख्य अतिथि असम के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी थे, और सत्र की अध्यक्षता हरि

परमपावन महामाता अंबिका जी खीर भवानी ने की। इस अवसर पर गुरुघासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल; भारतीय विश्वविद्यालय संघ की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल; इंडिया हैबिटैट सेंटर के निदेशक प्रो. के. जी. सुरेश; और यूएनआई कौशल, मुंबई की सीईओ सुश्री मृदुला त्रिपाठी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। धन्यवाद ज्ञापन दिव्ये फाउंडेशन की संस्थापक प्रो. दिव्या तंवर ने प्रस्तुत किया।

अपने  व्याख्यान “विकसित भारत के लिए नारी शक्ति हेतु नीडोनॉमिक्स” में प्रो. गोयल ने कहा कि महिलाएं केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि सर्जक, पोषक और परिवर्तन की प्रेरक शक्ति हैं। उन्होंने “नीडो-उपभोग”  — अर्थात ज़रूरत आधारित, विचारशील उपभोग — को नैतिक और टिकाऊ विकास के लिए आवश्यक बताया।

भगवद गीता से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने नीडोनॉमिक्स को “सही विकास” का स्वदेशी मॉडल बताया, जो व्यक्ति, प्रकृति और समानता को प्राथमिकता देता है। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उन्होंने “3 डी ” सूत्र प्रस्तुत किया — दृढ़ संकल्प, समर्पण और अनुशासन, जिन्हें अपनाकर महिलाएं सार्थक प्रगति कर सकती हैं।

प्रो. गोयल ने महिलाओं से अपील की कि वे अनावश्यक उपभोग से बचें, स्थानीय और नैतिक उत्पादों को बढ़ावा दें, और परिवार व समाज को टिकाऊ मूल्यों से नेतृत्व दें।

माँ हीराबेन को श्रद्धांजलि स्वरूप,  सीएनएमएस –नमो केंद्र ने महिलाओं से आग्रह किया कि वे “स्ट्रीट स्मार्ट” बनें — सरल, नैतिक, क्रियाशील, उत्तरदायी और पारदर्शी।

प्रो. गोयल ने कहा, “भारतीय महिलाओं को केवल बदलाव का लाभार्थी नहीं, बल्कि उसकी अगुवाई करनी चाहिए। नीडोनॉमिक्स से सशक्त होकर, वे भारत को उद्देश्यपूर्ण और समावेशी भविष्य की ओर ले जा सकती हैं।”

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