प्रो. एम. एम. गोयल ने आईसीआईसीएफटी 2025, सीएमआर विश्वविद्यालय, बेंगलुरु में ‘भारत की डिजिटल आत्मा निर्माण हेतु उद्देश्य- संचालित फिनटेक में नीडोनॉमिक्स दृष्टिकोण’ प्रस्तुत किया
बेंगलुरु, 8 नवम्बर: “उद्देश्य-संचालित फिनटेक: डिजिटल भारत में नवाचारों और चुनौतियों के लिए नीडोनॉमिक्स दृष्टिकोण” विषय पर प्रो. मदन मोहन गोयल, नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक, तीन बार कुलपति रहे तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में समापन संबोधन दिया गया। यह संबोधन सीएमआर विश्वविद्यालय, बेंगलुरु द्वारा आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इनोवेशन्स एंड चैलेंजेस इन फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी (आईसीआईसीएफटी 2025) में हुआ।
इस अवसर पर सीएमआर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ. सबीथा राममूर्ति ने अध्यक्षता की। कुलपति प्रो. एच. बी. राघवेंद्र ने स्वागत भाषण दिया, जबकि स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड कॉमर्स के निदेशक प्रो. भूपेंद्र बहादुर तिवारी ने प्रो. गोयल की उपलब्धियों पर आधारित प्रशस्ति-पत्र प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सीएमआर विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. के. सी. राममूर्ति (आईपीएस, सेवानिवृत्त), लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. मनोज कुमार तथा श्री अखिल शर्मा ने क्रमशः विशिष्ट अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की।
प्रो. गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को सिद्धांत-आधारित, तकनीक-सक्षम और विश्वास-नियोजित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता है, जो वित्त की सादगी, स्थिरता और डिजिटलीकरण सुनिश्चित करे ताकि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य साकार हो सके।
उन्होंने उल्लेख किया कि फिनटेक ने पहले ही भारत के वित्तीय जीवन को बदल दिया है—अब भुगतान तत्काल हो रहे हैं, बचत और ऋण एक क्लिक पर सुलभ हैं, और नवोन्मेषी स्टार्टअप्स वित्तीय तकनीक की सीमाओं को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। फिर भी उन्होंने चेतावनी दी कि सफलता का नैतिक मापदंड केवल लेन-देन की गति या यूनिकॉर्न वैल्यूएशन नहीं हो सकता।
नीडोनॉमिक्स के दृष्टिकोण से विचार करते हुए, प्रो. गोयल ने स्पष्ट किया कि फिनटेक की असली परीक्षा उसकी इस क्षमता में है कि वह असुरक्षा को घटाए, सशक्तिकरण बढ़ाए और मानव गरिमा की रक्षा करे। उन्होंने आग्रह किया कि उद्देश्य-प्रधान फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र को तकनीक को नैतिकता से जोड़ना चाहिए, समान अवसर सुनिश्चित करना चाहिए और नवाचार को आम नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, “भारत को केवल डिजिटल पैमाने में ही नहीं, बल्कि डिजिटल आत्मा में भी अग्रणी बनने के लिए नियामकों, उद्यमियों और नीतिनिर्माताओं को एक समान दिशा-सूचक अपनाना होगा—मानव कल्याण को अधिकतम करना, शोषण को न्यूनतम करना और ऐसी व्यवस्थाएं बनाना जो कुछ के लिए नहीं, बल्कि सबके लिए हों।”
अंत में प्रो. गोयल ने कहा कि नीडोनॉमिक्स से प्रेरित फिनटेक बाजार-प्रेरित नवाचार से आगे बढ़कर तकनीक की नैतिक अर्थव्यवस्था बन जाती है—जो भारत की आवश्यकताओं की पूर्ति बुद्धिमत्ता, निष्पक्षता और करुणा के साथ करती है।
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