प्रो. एम.एम. गोयल ने महंथ महादेवानंद महिला महाविद्यालय, वीकेएसयू आरा में नीडोनॉमिक्स के माध्यम से अनुसंधान को उद्देश्य के साथ जोड़ने का आह्वान किया।
आरा, 16 अक्टूबर: वी.के.एस.यू., आरा के प्रो-वाईस चांसलर एवं तीन बार कुलपति रहे नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक प्रो. मदन मोहन गोयल ने महान्थ महादेवनंद महिला महाविद्यालय, आरा में आयोजित बहुविषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “बहुविषयक शोध, व्यवहार और नवाचार में हाल के रुझान” के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि “नीडोनॉमिक्स (आवश्यकताओं की अर्थशास्त्र) के माध्यम से शोध को उद्देश्य से जोड़ना सतत भविष्य के लिए अनिवार्य है।”
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एन.पी.पालित ने स्वागत भाषण दिया और प्रो. एम.एम. गोयल का प्रतिभागियों से परिचय कराया।
आमंत्रण के लिए डॉ. एन.पी.पालित के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रो. गोयल ने कहा कि “डॉ. पालित जीवन-मुक्ति की भावना का प्रतीक हैं—ऐसे व्यक्ति जो जीवन रहते हुए भी अपने कर्मों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। वे पद्मश्री प्राप्तकर्ताओं से भी महान हैं, जैसा कि अनुगीता के मर्म में निहित है।”
डीएसपीएम विश्वविद्यालय, रांची के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. तपन कुमार शांडिल्य ने अध्यक्षीय संबोधन देते हुए प्रो. एम.एम. गोयल द्वारा प्रवर्तित नीडोनॉमिक्स को सबसे प्रासंगिक नीति के रूप में सराहा। इस अवसर पर प्रो. ब्रज राज कुमार सिन्हा, प्रो-वाइस चांसलर, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया; प्रो. गणेश माहतो, प्रो-वाइस चांसलर, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना; तथा डॉ. के.बी. सिंह, अध्यक्ष, फ्यूटैब ने भी अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. विजयश्री, आयोजन सचिव ने कार्यक्रम का संचालन किया।
“ज्ञान के साथ उद्देश्य: नीडोनॉमिक्स रूपरेखा में बहुविषयक शोध द्वारा सतत भविष्य” विषय पर बोलते हुए प्रो. गोयल ने कहा कि “बहुविषयक शोध मानवता को वैश्विक चुनौतियों से निपटने के उपकरण तो देता है, लेकिन यदि उसमें नैतिकता का मार्गदर्शन न हो तो वह जरूरत की जगह लालच की सेवा करने लगता है।”
उन्होंने कहा, “नीडोनॉमिक्स की शिक्षा का अर्थ है प्रतिदिन अपने मस्तिष्क को जागरूक उपभोग की सशक्त बुद्धि से भरना।”
प्रो. गोयल ने कहा कि “नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट शोध के लिए एक नैतिक दिशा-सूचक प्रदान करता है। यदि ज्ञान शक्ति है, तो उद्देश्यपूर्ण ज्ञान ही सच्ची प्रगति है,”।
प्रो. गोयल ने जोर देकर कहा कि सतत भविष्य के लिए प्रौद्योगिकीय प्रगति को नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ना आवश्यक है।
नीडोनॉमिक्स के स्ट्रीट स्मार्ट फ्रेमवर्क को रेखांकित करते हुए उन्होंने शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे सादगी , नैतिकता , कार्य-उन्मुखता , उत्तरदायित्व और पारदर्शिता जैसे गुणों को अपनाएं ताकि उनका योगदान समावेशी और प्रभावशाली बन सके।
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