समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 8 अगस्त: कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप पर बीजेपी ने कड़ा पलटवार किया है। बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली एक विधानसभा सीट में मतदाता सूची में धांधली के दावे ने सियासी माहौल गरमा दिया है।
बीजेपी का राहुल गांधी पर सीधा हमला
शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ असंवेदनशील भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। यादव ने कहा,
“राहुल गांधी कह रहे हैं कि सत्ता में आने पर चुनाव आयोग के बड़े-छोटे अधिकारियों को परिणाम भुगतने होंगे। क्या यह भाषा देश की संवैधानिक संस्थाओं के लिए उचित है?”
उन्होंने राहुल गांधी के “एटम बम” वाले बयान को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि यह अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।
तथ्यों को लेकर BJP की चुनौती
भूपेंद्र यादव ने दावा किया कि राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में 1 करोड़ वोट बढ़ने की बात कहकर “तैयारी के साथ बहुत बड़ा झूठ” बोला।
बीजेपी के मुताबिक:
- विधानसभा चुनाव 2024 – 9,71,41,289 वोटर
- लोकसभा चुनाव – 9,30,61,760 वोटर
- वास्तविक अंतर – 40 लाख वोट, जबकि राहुल गांधी ने 1 करोड़ का दावा किया।
यादव ने तंज कसा,
“अगर वह आगे भी कुछ कहेंगे, तो क्या हमें उसे 60% माइनस करके समझना चाहिए?”
‘फेक नैरेटिव’ बनाने का आरोप
बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी का कथित ‘आर्टिफिशियल वोट बढ़ाने’ का सिद्धांत उन्हीं के तथ्यों से ध्वस्त हो जाता है, क्योंकि जिन सीटों पर वोट बढ़े, वहां कांग्रेस को ही जीत मिली।
यादव ने कहा,
“चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र है। लेकिन चुनाव हारने के बाद विपक्ष फेक नैरेटिव बनाकर जनता को गुमराह कर रहा है।”
राहुल गांधी का आरोप
दूसरी ओर, राहुल गांधी का दावा है कि 40 लोगों की एक टीम ने छह महीने की मेहनत के बाद मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली के सबूत जुटाए हैं।
उनके मुताबिक:
- मतदाता सूची में नामों की हेरफेर
- चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच मिलीभगत
- चुनावों में ‘चोरी’ के आरोप
राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है और कहा है कि वह इसे जनता के सामने उजागर करेंगे।
सियासी असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में चुनावी माहौल पहले से गरम है। विपक्ष चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, वहीं बीजेपी इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बता रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर शहरी सीटों और सोशल मीडिया बहसों में।
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